मजबूती की तरफ कैसे बढ़े भारतीय अर्थव्यवस्था


मुंबई

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से प्रभावित अर्थव्यवस्था के पुनरूद्धार को आगे बढ़ाने के लिये सभी पक्षों- राजकोषीय, मौद्रिक और विभिन्न क्षेत्रों- से नीतिगत समर्थन की जरूरत पर जोर दिया है। इस महीने की शुरूआत में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में भाग लेते हुए दास ने कहा था कि अप्रैल और मई में महामारी की दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था पर जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, उसको देखते हुए आर्थिक पुनरूद्धार को समर्थन देने और उसे टिकाऊ बनाने के लिए मौद्रिक उपायों को जारी रखने की जरूरत है।    

 एमपीसी बैठक के शुक्रवार को जारी ब्योरे के अनुसार कुल मिलाकर कोविड-19 की दूसरी लहर ने निकट अवधि के परिदृश्य को बदल दिया है और आर्थिक पुनरूद्धार को आगे बढ़ाने तथा उसे तेजी से पटरी पर लाने के लिये सभी पक्षों- राजकोषीय, मौद्रिक और विभिन्न क्षेत्रों- से नीतिगत समर्थन की जरूरत है।    

 उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टीकाकरण की गति और जिस तेजी से हम दूसरी लहर को काबू में ला सकते हैं, वह आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ मुद्रास्फीति के दायरे पर असर डालेगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक दूसरी लहर से प्रभावित महत्वपूर्ण क्षेत्रों के दबाव को दूर करने के लिये सक्रियता के साथ परंपरागत और गैर-परंपरागत उपाय करने के साथ प्रभावी तरीके से नकदी की उपलब्धता के लिये कदम उठाने को लेकर प्रतिबद्ध है।   

दास और एमपीसी के पांच अन्य सदस्य शशांक भिडे, आशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा, मृदुल के सागर और माइकल देबव्रत पात्रा ने आम सहमति से प्रमुख नीतिगत दर को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखने के पक्ष में मत दिया। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पात्रा ने कहा कि पहली लहर के विपरीत इस बार आपूर्ति की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। लेकिन शुद्ध निर्यात को छोड़कर सकल मांग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और ऐसे में नीतिगत समर्थन की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि एमपीसी ने वृद्धि को समर्थन देने के लिये नीतिगित दर को अब तक के न्यूनतम स्तर पर रखकर इसके लिये आवश्यक स्थिति को बनाये रखने का काम किया है। 


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