अब कोई नादानी ना हो

कोरोना की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ रही है. देश के कई राज्यों ने अब जन जीवन सामान्य करने के लिए थोड़ी बहुत ढील दिए जाने की शुरुआत की है, परन्तु मृत्यु का आंकड़ा अभी भी चार हजार के आस-पास मडरा रहा है. इसके साथ कोरोना से उबर रहे लोगों में अन्य बीमारियों की आहट भी देश और राज्य सरकारों की चिंता का विषय है. म्युकरमाइकोसिस जैसी बीमारी ने लोगों को दहशत में डाल दिया है और तीसरे लहर की भी सतत भविष्यवाणियां की जा रही हैं. इधर कुछ दिनों से वैक्सीनों की आपूर्ति पर्याप्त ना हो पाने से शुरुआत में जो वैक्सीनेशन अभियान तेज गति से चल रह था, अब थोड़ा थम कर चल रहा है. कोरोना महामारी पर विजय के लिए यह जरूरी है की वैक्सीनेशन देश भर में तेज गति से हो, इसके लिए देश के अन्दर उत्पादन बढ़ाने और विदेश में भी वैक्सीन मनाने के प्रयास युद्ध स्तर पर हो रहे हैं, जो परिणाम भी दे रहे हैं. जल्द ही प्रचुर मात्रा में देशी और विदेशी वैक्सीन उपलब्ध होने की सूचना है, तब तक हमारे लिए यानी देश के जन जन के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी ओर से हर वह सतर्कता और एहतियात बरतें जिससे ना ही वह महामारी की चपेट में आये और ना ही इसके प्रसार का कारण बनें. कारण आज जो भयावह हालत बने हैं उसमें हमारी यानी देशवासियों की लापरवाही का बहुत बड़ा योगदान है. कम से कम अब जब तक वांछित जनसंख्या का पूर्ण वैक्सीनेशन नहीं जो जाता तब तक कम से कम अपनी ओर से सतर्क रहें और अपनों को सतर्क रखें. तभी स्थिति नियंत्रित होगी और जो तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है उससे हम बच सकेंगे और आर्थिक गतिविधियां जो जीने के लिए बहुत जरूरी हैं चालू रह सकेंगी. लगभग साल भर से ज्यादा समय बीतने को है देश में आर्थिक क्रिया-कलाप सही तरीके से संचालित नहीं हो पाए, कारण कोरोना की कहर से बचना ज्यादा जरूरी है. लेकिन समस्या को ज्यादा विकराल बनाने में हमारा भी कम योगदान नहीं है. कारण हमसे जो सावधानियां बरतने की अपेक्षा थी, हम उस पर खरे नहीं उतरें अलबता कहीं-कहीं तो लापरवाही की पराकाष्ठा हुई. कम से कम हमें सावधान होना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे जो आफत हमारे सर पर नाच रही है वह और विकराल ना हो और लहर पर लहर झेलने का यह सिलसिला रुके. सतर्कता के साथ-साथ सहयोग की भी आवश्यकता है. काफी तादाद में परिवारों ने अपनों को खोया है. कहीं परिवार का मुखिया असमय काल के गाल में समा गया है और बचा हुआ परिवार अड़चन में है, कहीं माता-पिता दोनों महामारी के भेंट चढ़ गए है और पूरा परिवार अनाथ है. इस पर सरकार और समाज दोनों को सोचना होगा और उनका भावी जीवन कैसे चले इस पर विचार करना होगा और हर संभव प्रेस करना होगा की उनकी जीवन की गाड़ी भी चल सके. केंद्र और राज्य सरकार दोनों ओर से महामारी से प्रभावित बच्चों के भविष्य सवारने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गयी है, जो सरहनीय है. लेकिन अक्षम विधवाओं पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है, उन्हें तात्कालिक मदद के आलावा कुछ ऐसा हुनर सिखाने की दिशा में भी कदम उठाया जा सकता है, जिससे कालांतर में वे अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार की गाड़ी खींच सके और उनका परिवार तमाम तरह के जहालतों और चुनौतियों से बच सके. हम सब मिलकर पूरी सतर्कता के साथ अपना काम करेंगे और भुक्त भोगियों के पार्टी उदारता का दृष्टिकोण रखते हुए एक-दूसरे की जो बन सकता है मदद करेंगे तो जो चुनौती देश इस समय झेल रहा है उससे बाहर निकलना काफी आसान होगा. इसलिए अब देश के किसी भी क्षेत्र के नागरिक के लिए किसी भी तरह की लापरवाही को कोई जगह नहीं है. हम सबको पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ना है, ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे समस्या और विकराल हो साथ ही जल्द से जड़ वैक्सीन भी लेना है और कोरोना को अपने बीच से सदा सदा के लिए रुखसत करना है. अब किसी भी तरह की नादानी के लिए कोई जगह नहीं है.


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