टीकाकरण की अहमियत

जिस समय भारत के संदर्भमें हमें यह चिंताजनक खबर पढ़ने को मिल रही है कि यहां 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में वैक्सीन लेने की रफ्तार धीमी पड़ गई हैऔर लगभग 52 फीसदी बुजुर्गोंने टीके की अभी पहली खुराक तक नहीं ली है, तब अमेरिका से टीकाकरणअभियान की कामयाबी का एक सुखद समाचार आया है। वहां एक अध्ययन में पाया गया है कि अब जितनी भी मौतें हो रही हैं, उनमें करीब 99 फीसदी वे लोग हैं, जिन्होंने कोविड-19 की वैक्सीन नहीं लगवाई थी। मई में 18,000 से अधिक अमेरि­कियोंने इस वायरस के कारण अपनी जान गंवाई, मगर उनमें से करीब 150 लोग ही ऐसे थे, जिन्होंने टीके की दोनों खुराकें ले रखी थीं। गौर करने वाली एक अहम बात यह भी है कि जनवरी के मध्यमें वहां रोजाना औसतन 3,400 लोगोंकी जान जा रही थी। तब वहां टीकाकरण अभियान शुरू हुए एक महीना ही हुआ था। मगर आज वहां कोविड-19 के कारण मरने वालोंकी दैनिक संख्या 300 से नीचे आ गई है। मान्य आयु वर्गके 63 प्रतिशत अमेरिकी एक खुराक और करीब 53 फीसदी दोनों टीके लगवा चुके हैं। अमेरिका से आए ये ब्योरे टीकाकरणकी अहमियत स्थापित करते हैं। हालांकि, ये यह भी बताते हैं कि अमेरिकी समाज में भी टीकों को लेकर संशय या दुराग्रह पालने वालोंकी कमी नहीं है। बहरहाल, वैक्सीन की प्रभावशीलता से जुड़ी इन जानकारियोंका लाभ दुनिया भर की सरकारोंको उठाना चाहिए और अपने टीकाकरण अभियान को गति देनी चाहिए। खासकर भारत के लिए यह काफी अहम है, क्योंकि न सिर्फ इसको तीसरी लहर की आशंकाओं को निर्मूल करना है, बल्कि असंख्य लोगोंके भय, पूर्वाग्रह को दूर कर उन्हें टीकाकरण केंद्रों तक लाना भी है। देश की विशाल आबादी को देखते हुए यह काफी चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन यह अनिवार्य हैऔर अनिवार्यता का कोई विकल्प नहीं होता। भारत का टी­काकरण अभियान पहले ही विसंगतियोंका शिकार रहा है। एक तरफ, इसके हिस्सेमें सर्वाधिक टीके लगाने वाले चंद देशोंमें शुमार होने की उपलब्धिहै, तो वहीं टीके की कमी के कारणलोगों का टीकाकरण केंद्रों से मायूस लौटना भी है। एक ओर, सौ फीसदी टीकाकरण वाले गांवहैं, तो दूसरी ओर टीकोंकी बर्बादी भी है। टीकोंकी दर, सुप्रीमकोर्टका हस्तक्षेप और केंद्र-राज्योंमें समन्वय की कमी जैसी बातोंको एक तरफ रख भी दें, तो अब भी इसमें निरंतरता की कमी है। किसी दिन कोई राज्य लाखों टीके लगाने के कीर्तिमान रच रहा है, तो अगले ही दिन वह संख्या हजारोंमें सिमट आ रही है। नहीं! यह इवेंट मैनेजमेंटका विषय नहीं है, लोगोंकी जिंदगी और देश के भविष्यका गंभीर मसला है। इसलिए केंद्र और राज्यसरकारें इस अभियान को गति देते समय टीकोंकी आपूर्ति, निरंतरता और क्षे­त्रफल का समान रूपसे ख्याल रखें। इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती कि जिस आयुवर्गमें अब तक करीब सौ फीसदी टीकाकरण हो जाना चाहिए था, उसके 52 प्रतिशत लोगोंको एक खुराक भी नहीं लगी है। अमेरिकी अध्ययन के नतीजे बता रहे हैं किन सिर्फ सरकारों, बल्कि समस्त सामाजिक समूहों और सजग नागरिकोंको अब यह मकसद बनाना पडे़गा कि टीकाकरण अभियान जल्दसे जल्द सफल हो, तभी भारत में भी कोविड-19 का दैत्य काबू में आ पाएगा। कोरोना महामारी के दौरान सावधानी बरतना न भूलें। 

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