आरक्षण को लेकर सर्वपक्षीय चिंतन बैठक

पंकजा मुंडे, नाना पटोले, सुनील केदार सहित कई नेता रहे मौजूद


मुंबई

ओबीसी समाज के राजनीतिक आरक्षण को लेकर रविवार को सर्वपक्षीय चिंतन बैठक का आयोजन किया गया। लोनावाला में हुई सर्वपक्षीय नेताओं की इस चिंतन बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थानीय चुनाव में ओबीसी समाज के राजनीतिक आरक्षण को रद्द किए जाने पर मंथन किया गया। समाज को दोबारा आरक्षण कैसे मिले, इस रणनीति पर चर्चा की गई। आरक्षण मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी के नेता एक मंच पर िदखे।  बैठक में भाजपा की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने कहा कि आरक्षण के संबध में इम्पेरिकल डेटा का मामला केंद्र का नहीं बल्कि राज्य सरकार का है। राज्य में तत्कालीन फड़नवीस सरकार में हमने पत्रव्यवहार किया था। ओबीसी समाज को अंधेरे से बाहर निकालने के लिए हम सब एक साथ आए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले भी इस मुद्दे को उठा रहे है इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। पंकजा मुंडे ने कहा कि किसी को  हमारी आलोचना  करने से उसे संतुष्टि मिलती है तो ठीक है लेकिन ओबीसी को न्याय मिले हमारी यही इच्छा है। मुंडे ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने पांच जिला परिषद चुनाव कराने की घोषणा कर दी है, अगर यह चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के हुआ तो अगले चुनाव में भी समाज को आरक्षण नहीं मिलेगा। इसलिए इस चुनाव को रद्द करना चाहिए। राज्य सरकार को इम्पेरिकल डेटा इकट्ठा कर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर ओबीसी के आरक्षण की रक्षा करनी चाहिए। मुंडे ने कहा कि राज्य सरकार को कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना चाहिए, जिसमें कोर्ट से तीन महीने के भीतर इम्पेरिकल डेटा इकट्ठा करने और चुनाव को टालने की मांग करनी चाहिए। सीएम ठाकरे को समाज के नेताओं से मुलाक़ात कर चुनाव रद्द करने के लिए कोर्ट में हलफनामा देने की मांग करनी चाहिए। ओबीसी चिंतन बैठक में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले, मंत्री सुनील केदार सहित कई राजनीतिक दलों के ओबीसी समाज के नेता उपस्थित थे।

चिंतन बैठक में प्रस्ताव पारित

चिंतन बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार को तुरंत सर्वोच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर करनी चाहिए। केंद्र सरकार से इम्पेरिकल डेटा की मांग राज्य सरकार को करना चाहिए। ओबीसी समाज के आरक्षण में मराठा समाज को आरक्षण नहीं देना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार को जातिगत जनगणना, पदोन्नति में आरक्षण देना चाहिए। सभी ओबीसी को पूरी फंडिंग मिलनी चाहिए, महाज्योती 1000 करोड़ प्राप्त कर संभागीय कार्यालय शुरू हो, संत गाडगे बाबा के नाम से ओबीसी के लिए आर्थिक विकास महामंडल की स्थापना की जानी चाहिए। विधानसभा और लोकसभा में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।  

मेरे पास भी वाघ

राज्य में शिवसेना के नेतृत्व वाली कांग्रेस-राकांपा की महाविकास आघाडी सरकार के नेता भले ही बार -बार सरकार में सब -कुछ ठीक का दावा कर रहे है लेकिन सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के नेताओ के बीच ऑल इज वेल वाली स्थिति नहीं है।इसका उदाहरण रविवार को ओबीसी आरक्षण मुद्दे पर  नागपुर में चिंतन बैठक आयोजित की गई थी जिसमे सभी राजनितिक दल के नेता उपस्थित थे।बैठक को संबोधित करते हुए राज्य के मदद पुनर्वसन मंत्री और ओबीसी नेता विजय वडेट्टीवार ने बिना नाम लिए शिवसेना पर जोरदार कटाक्ष किया (नाना पटोले) की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमारे पास भी एक वाघ  है।जो पार्टी के इशारो पर चलता है उन्होंने कहा कि मैं ऐसे क्षेत्र में रहता हूं जहां बहुत सारे बाघ हैं। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।  

ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर पहला विराट मोर्चा औरंगाबाद से

विजय वडेट्टीवार ने कहा कि मैं दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे का शिष्य और पंकजा मुंडे का गुरुबंधु हूँ। ओबीसी के साथ अन्याय हुआ है। अगर आप और मैं एक साथ आएंगे तो  यह अन्याय दूर हो जाएगा। वडेट्टीवार ने कहा कि मौजूदा समय में राज्य कोरोना की संकट से गुजर रहा है लेकिन मैं समाज को आश्वस्त करता हूँ की सामान्य स्थिति होने के तत्काल बाद आरक्षण की मांग को लेकर पहला मोर्चा औरंगाबाद से शुरू किया जाएगा। सत्तापक्ष के खिलाफ लड़ना आसान नहीं है। बावनकुले, मेरे ओबीसी नेता हैं, इसलिए मैं टिकट कटने से नहीं डरता। मैं समाज के लिए झुकने को तैयार हूं।'' मेरा जो होगा वह होगा, लेकिन मैं ओबीसी के मुद्दे पर चुप नहीं बैठूंगा।


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