वायरस की उत्पत्ति के खुलासे से पहले चीन ने डिलीट किया जरूरी डाटा


नई दिल्‍ली

कोरोना वायरस महामारी से दुनिया की जंग अब भी जारी है, इस बीच एक बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि वायरस की उत्पत्ति आखिर कहां से हुई थी? ज्यादातर देशों और विशेषज्ञों का मानना है कि ये चीन के वुहान शहर से फैला है। चीन की वुहान लैब को लेकर अब तक कई रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें कहा गया है कि वायरस इसी लैब में बनाया गया है। हालांकि चीन इन आरोपों को लगातार खारिज कर रहा है। अब खबर आई है कि चीन ने Sars-CoV-2 वायरस के शुरुआती डाटा को डिलीट कर दिया है।

जिससे वायरस की उत्पत्ति का पता लगाना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। एक शोधकर्ता ने ये दावा किया है। साइंटिफिक पेपर के अनुसार, कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के शुरुआती महीनों में संक्रमित लोगों की जो जांच की गई थी, उससे संबंधित डाटा को चीन ने मिटा दिया है। ताकि वायरस की उत्पत्ति का पता ना लगाया जा सके। डाटा को वायरस की बढ़त को ट्रैक करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय डाटाबेस से हटाया गया है। पेपर के लेखक ने कहा कि किसी के लिए भी वायरस के प्रसार को समझने के लिए वुहान में मिले शुरुआती मरीजों का डाटा काफी जरूरी है।

गूगल क्लाउड से बरामद हुआ डाटा

अमेरिका के सिएटल में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर में वायरोलॉजिस्ट और जीवविज्ञानी जेस ब्लूम का कहना है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ सिक्वेंस से डिलीट किए गए कुछ डाटा को वापस पा लिया गया है। ब्लूम ने डिलीट की गई फाइल गूगल क्लाउड से बरामद की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मीट के बाजार में वायरस की पहचान होने से पहले ही ये वुहान में फैल गया था। उन्होंने कहा कि डाटा हटाने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नजर नहीं आता। इसलिए ऐसा लग रहा है कि वायरस की उत्पत्ति का पता ना चल सके इसलिए डाटा को डिलीट किया गया है।

चीनी शोधकर्ताओं ने हटवाया डाटा

इस मामले में एनआईएच ने एक बयान जारी कर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय डाटाबेस से चीन में मिले कोरोना वायरस के शुरुआती सैंपल का डाटा हटा दिया गया है, जिसे चीन के ही शोधकर्ताओं के कहने पर स्टोर करके रखा गया था। चीन के शोधकर्ताओं ने डाटा को डिलीट करने के लिए कहा था। एजेंसी का कहना है कि शोधकर्ताओं को अधिकार है कि वह डाटा 

हटाने के लिए बोल सकें। वहीं चीन की इस हरकत के बाद लैब लीक थ्योरी को एक बार फिर बल मिल रहा है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवान ने कहा था अगर चीन कोरोना महामारी की उत्पत्ति की जांच में सहयोग नहीं करेगा, तो वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़ जाएगा।


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