राज्य में मिला निपाह वायरस

NIV के रिसर्च  से खुलासा

nipah virus

पुणे

कोरोना की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ गई है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा अभी भी मंडरा रहा है। तीसरी लहर को रोकने के लिए अभी पूरे राज्य में तेजी से वैक्सीनेशन किया जा रहा है। अभी कोरोना का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है कि महाराष्ट्र में दूसरे बड़े संकट की आहट सुनाई दे रही है। राज्य में दो चमगादड़ की प्रजाति में निपाह वायरस पाया गया है। पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) के विशेषज्ञों की रिसर्च में इसकी जानकारी सामने आयी है। निपाह वायरस वाले चमगादड़ की प्रजाति सातारा के महाबलेश्वर के गुफा में पहली बार मार्च 2020 में पाया गया। इससे पहले राज्य में कभी भी चमगादड़ में निपाह वायरस नहीं पाया गया है। हालांकि देश में अब तक चार बार यह वायरस मिला है। इसकी जानकारी इस पर रिसर्च करनेवाली एनआईवी की टीम की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा यादव ने दी है। देश में इससे पहले कुछ राज्य में निपाह वायरस आ गया है। यह वायरस चमगादड़ से मनुष्य में ट्रांसफर होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 10 संक्रामक रोगों की पहली सूची में निपाह वायरस को शामिल किया है। यह वायरस बहुत खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसकी कोई दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। निपाह वायरस का संक्रमण होने पर मृत्यु दर बहुत है।  कोरोना संक्रमण होने के बाद काफी लोग ठीक हो जाते हैं। देश में लगभग सभी राज्य में इसका रिकवरी रेट 90 फीसदी से अधिक है। वहीं मृत्यु दर 1 से 2 फीसदी है। निपाह की दवाई उपलब्ध न होने से मृत्यु दर 65 फीसदी से अधिक है। पिछले कई वर्षों से चमगादड की वजह से इस वायरस के फैलने की बात कई बार सामने आई है। ईबोला, मारबर्ग जैसे वायरस चमगादड़ की वजह से ही फैले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस भी चमगादड़ से ही आया है। अब जबकि यह खतरनाक वायरस महाराष्ट्र में पाया गया है तब सभी की चिंता बढ़ गई है।


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