'रागी' आपके किचन में है या नहीं


कोरोना महामारी के बाद अब लोग पहले से ज्यादा अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हुए हैं, इसमें कोई दो राय नहीं. यही कारण है कि कुछ ऐसे भोजन जो हमारी थाली से दूर जा चुके थे फिर से किचन में जगह बना रहे हैं. मोटा अनाज इसी में से एक है. ऐसी ही एक किस्म का जिक्र मैं आज करने जा रहा हूं. इसे 'सूपर फूड' का भी नाम दिया गया है. साथ ही बच्चों के सही विकास के लिए तो यह रामबाण माना जाता है.

रागी का राग बहुत पुराना

जी, मैं बात करने जा रहा हूं 'रागी' के बारे में. सैकड़ों साल पहले यह फसल अफ्रीका से सीधे कर्नाटक पहुंची थी. वहां के स्पेपल फूड के तौर पर इसकी पहचान है लेकिन अब यह धीरे-धीरे कई राज्यों में मशहूर है. इससे बनने वाला डोसा भी घरों में खूब प्रचलित है.

गुणों के कारण मिली ख्याति

रागी लिवर संबंधी बीमारियों में बहुत काम आता है. साथ ही कैल्शियम, मिनिरल, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरा हुआ होता है. इसके साथ ही पेट के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं. इसको दूध में पका कर, रोटी बनाकर, लिट्टी बना कर या लड्डू बना कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

भारत में नंबर वन

भारत रागी उगाने में नंबर वन है. पूरी दुनिया में होने वाली सप्लाई का 30 प्रतिशत हिस्सा भारत अकेले पूरी करता है. इसके बाद अफ्रीका और नाइजीरिया का नंबर आता है. आने वाले दिनों में इसकी मांग काफी बढ़ेगी क्योंकि दुनिया अब इसके फायदे को पहचानने लगी है.

कई राज्य दे रहे बढ़ावा

कई राज्य रागी की खेती को अब बढ़ावा दे रहे हैं. यहां तक कि छत्तीसगढ़ ने अभी-अभी ऐलान किया है कि वह रागी की सारी फसल MSP यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेगा. इससे रागी की खेती और बढ़ने वाली है. लेकिन, अफसोस है कि ज्यादातर भारतीय किचन से यह गायब ही है.

इन राज्यों में भारी मांग

भारत में रागी का इस्तेमाल राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में खासा होता है. इसके साथ ही रागी देश के अन्य हिस्सों में भी खाया जाता है. कम कीमत में ज्यादा पौष्टिकता देने के साथ ही इसका भंडारण आसान है. इसमें कीट नहीं लगते इसीलिए इसे 'आर्थिक रूप से कमजोर किसानों' का खाना भी कहा जाता है.


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