ड्रैगन की खतरनाक चाल

भारत के खिलाफ जासूसी के लिए तिब्बती युवाओं का इस्तेमाल


नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच फिलहाल पूर्वी लद्दाख में गतिरोध बना हुआ है और ड्रैगन को लगता है कि भारत का सारा ध्यान सिर्फ इसी तरफ है। मौके का फायदा उठाकर चीन ने सिक्किम और भूटान के बीच चुंबी वैली के पास अपनी गतिविधियां तेज की हुई हैं। लेकिन भारत चीन की हर हरकत पर पूरी LAC पर ही नजरें गड़ाए हुए बैठा है। 2017 में 73 दिन तक डोकलाम में चले गतिरोध में जिस तरह भारत ने सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर चीन को पटकनी दी उसके बाद से ड्रैगन का ध्यान उस इलाके में ज्यादा है।

उस समय तो भारतीय सेना के मूवमेंट और कार्यशैली के बारे में जानकारी न होने के चलते चीन को मुंह की खानी पड़ी, लेकिन अब चीन ने भारतीय सेना की मूवमेंट पर नजर रखने के सिए न सिर्फ अत्याधुनिक निगरानी उपकरण लगाए हैं, बल्कि चुंबी वैली से सटे तिब्बत के यादोंग काउंटी में रहने वाले तिब्बती युवाओ को भारत और भूटान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने की ट्रेनिंग देने में लगा हुआ है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन सिक्किम के दूसरी और तिब्बत के यादोंग और इसके पास के गांव के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर अपना मिलिशिया ग्रुप तैयार कर रहा है। इनका इस्तेमाल वो ह्यूमन इंटेलिजेंस इकट्ठा करने के लिए करने वाला है। इनकी तैनाती उन बॉर्डर इलाकों में की जाएगी, जहां से व्यापार होता है। इसके अलावा भारतीय सीमा के साथ-साथ बने मॉडल गांवों में तैनात करने की भी तैयारी की जा रही है। चीन ने बाकायदा स्पेशल तिब्बत आर्मी यूनिट तैयार की है। इसका नाम रखा गया है मिमांग चेटोन तिब्बती भाषा में इसका मतलब है पब्लिक के लिए। सूत्रों की मानें, तो 100 नौजवानों के दो बैच चीन ने फिलहाल तैयार किए हैं, जिनमें में से एक बैच की ट्रेनिग पूरी भी हो चुकी है, जिन्हें चुंबी वैली के युतुंग, चीमा, रिनचेंगंग, पीबी थांग और फारी में तैनात किया गया गया है। जबकि दूसरे बैच की ट्रेनिंग जारी है और ऐसा पहली बार हुआ है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन तिब्बत के नौजवानों को बौद्ध धर्म गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए भी ले जाया गया।

सूत्रो की मानें, तो चीनी सेना में शामिल हान समुदाय के लोग तकनीकी तौर पर तो तेज होते हैं, ले‌िकन जमीनी लड़ाई के लिए सबसे नाजुक माने जाते हैं। ऐसे में तिब्बत में एलएसी पर भारत से मिली चुनौती के बाद चीन उसी परिवेश में पले-बढ़े और एलएसी के इलाकों के बारे में पूरी जानकारी रखने वाले तिब्बतियों को मीलीशिया फोर्स में भर्ती कर रहा है। जानकारी के मुताबिक चीनी सेना में साल 2010 में 21 लाख मूल रूप से चीनी यानि हान वंशी सैनिक थे, जबकि तिब्बती युवाओं की तादाद केवल 4300 थी। अब वो इस तादाद को तो बढ़ाना चाहता है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से। चीन को इस बात का भी डर है कि कहीं ये नए सैनिक ट्रेनिंग के बाद तिब्बत की आजादी को लेकर मोर्चा न खोल दें।


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