समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत

इंडिया का प्रोजेक्टः 50 हजार करोड़ में छह हाईटेक सबमरीन बनेंगी, पहली आठ साल बाद मिलेगी


नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश में छह हाईटेक सबमरीन बनाने के प्रोजेक्ट का रास्ता साफ कर दिया है। 50 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने दो कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट कर लिया है। DAC ने भारतीय कंपनियों मेजागॉन डॉक्स (MDL) और लार्सन एंड टर्बो (L&T) का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) या टेंडर मंजूर कर लिया है। इन कंपनियों को डीजल इलेक्ट्रिक प्रोग्राम का जिम्मा सौंपा जाएगा। इसे प्रोजेक्ट-75 इंडिया या P-75I का नाम दिया गया है। डील से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बोली लगाने और किसी बोली के फाइनल होने में एक साल का वक्त लगेगा। इसके बाद असल कॉन्ट्रैक्ट तैयार होगा और उस पर साइन होंगे। इसके बाद पहली सबमरीन की डिलिवरी करीब सात साल बाद होगी, यानी मौजूदा वक्त से आठ साल बाद। इस पूरे प्रोजेक्ट पर अगले 10-12 साल तक 50 हजार करोड़ का बजट खर्च किया जाएगा।

सबमरीन की खासियत 

प्रोजेक्ट-75 के तहत बनने वाली सबमरीन का साइज हमारे पास मौजूद स्कॉर्पिन सबमरीन से दोगुना होगा। नेवी इन सबमरीन में बेहद मजबूत फायर पावर चाहती है। इंडियन नेवी ने एंटी शिप क्रूज मिसाइल और लैंड अटैक क्रूज मिसाइल इन सबमरींस में लगाने की डिमांड की है। इस डील को मदर ऑफ ऑल अंडरवाटर कॉम्बैट डील्स कहा जा रहा है। इसमें पानी से जमीन पर मार करने वाली क्रूज मिसाइल रहेंगी। इसके अलावा पानी और हवा में भी इसकी मारक क्षमता प्रभावी रहेगी। भारत को इस तरह की मारक क्षमता की जरूरत 2007 से है। ऐसे में ये सबमरीन प्रोजेक्ट डिफेंस सेक्टर के लिए बेहद अहम है।

कोई और प्रोजेक्ट भी पाइपलाइन में है?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा को लेकर बनाई गई कैबिनेट कमेटी के पास एक और प्रोजेक्ट पेंडिंग है। इसके तहत 6 न्यूक्लियर पावर अटैक सबमरींस (SSNs) बनाई जानी हैं। इस डील का रास्ता साफ होते ही पहली बार में 3 ऐसी सबमरीन बननी शुरू हो जाएगी। इनका वजन 6 हजार टन रहेगा। हर एक 15 हजार करोड़ की लागत से बनाई जाएगी।


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