समाज को स्वतंत्र आरक्षण देने से पीछे भाग रही है राज्य सरकार


मुंबई

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मराठा आरक्षण रद्द करने के बाद यह स्वाभाविक  था कि केंद्र सरकार द्वारा लागू आर्थिक दृष्टि से कमजोर सवर्ण समाज को  10 प्रतिशत आरक्षण मिले, लेकिन  राज्य  सरकार को  मराठा समाज  को स्वतंत्र आरक्षण देने की जिम्मेदारी से नहीं भागना चाहिए। सोमवार को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि  आर्थिक दृष्टि से कमजोर मराठा समाज को आरक्षण देने से सरकार अगर अपनी जिम्मेदारी से पीछे भागती है तो समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। 

सरकार को  चेतावनी देते हुए पाटिल ने कहा कि  मराठा समाज बिना स्वतंत्र आरक्षण लिए सरकार को छोड़ेगी नहीं। सुप्रीम कोर्ट में मराठा आरक्षण देने के बाद  सरकार ने सुनवाई में गायकवाड़ आयोग की रिपोर्ट ठीक से नहीं बना पाई और वे रिपोर्ट का बचाव करने में भी विफल रहीं। नतीजतन, सुप्रीम कोर्ट ने गायकवाड़ आयोग को खारिज कर दिया और मराठा समुदाय के पिछड़ेपन का मुद्दा उसके साथ चला गया। मोदी सरकार द्वारा आर्थिक दृष्टि से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण गरीब लोगों के लिए है। जब तक मराठा समुदाय को स्वतंत्र आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक राहत के रूप में वित्तीय आरक्षण का लाभ ठीक है। पाटिल ने कहा कि ठाकरे सरकार को मराठा समुदाय को फिर से स्वतंत्र आरक्षण देने की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा की सर्वोच्च न्यायालय में समाज के आरक्षण की पुनर्विचार याचिका करने की अंतिम तारीख  चार जून है, लेकिन  सरकार ने अभी तक पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की है। इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने वाली समिति को सात जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। 


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