सहकारिता क्षेत्र को खत्म करने की कोशिश : पाटिल

आरबीआई की सहकारिता नीति की आलोचना

jayant patil

मुंबई 

राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जलसंपदा मंत्री जयंत पाटिल ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सहकारी क्षेत्रों के बैंकों पर प्रतिबंध लगाने की नीति की निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को खत्म करने की कोशिश कर रही है। सीबीआई, ईडी के बाद अब आरबीआई सहकारी क्षेत्रों के लोगों पर दबाव बना रही है।

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने सांसदों, विधायकों और नगर निगमों या अन्य स्थानीय निकायों के सदस्यों को शहरी सहकारी बैंकों में प्रबंध निदेशक (एमडी) या पूर्णकालिक निदेशक का पद संभालने पर रोक लगा दी है। इस मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में पाटिल ने नांदेड में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरबीआई पॉलिसी की निंदा की। उन्होंने कहा कि निजीं बैंक के दरवाजे सामान्य लोगों के लिए खुले नहीं थे, यह बात महसूस होने पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। सरकार का मतलब सामान्य लोगों से मिलकर बनने वाली ताकत है। इस शक्ति से कई संस्थाएं खड़ी हुई, लेकिन केंद्र सरकार संपूर्ण महाराष्ट्र की नहीं, देश भर के सहकारिता क्षेत्र को खत्म करना चाहती है। पाटिल ने यह भी कहा कि भाजपा की भावना है कि मोदी के बिना किसी को कुछ नहीं करना चाहिए।

पाटिल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की तरफ से की गई गलतियों पर आरबीआई या नाबार्ड का नियंत्रण हो, यह मांग थी, लेकिन नाबार्ड का कंट्रोल चला गया और आरबीआई ने कंट्रोल ले लिया। अब जबकि रिजर्व बैंक ने सभी निदेशक मंडलों के लिए एक और सलाहकार बोर्ड की नियुक्ति का आदेश दिया है। अब इतने नियंत्रण के बाद हमारी अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़ेगी? उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में ग्रोथ के लिए उदार सोच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर बात में सरकार उदार है, तो इकोनॉमी ग्रोथ तेजी से होती है। पाटिल ने कहा कि सरकार व्यवस्था में प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रही है, तो उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कुछ करना चाहिए, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार नहीं होता है, तब तक संस्था को अपने आप बढ़ने देना चाहिए।


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