मोदी का मिशन, कश्मीर में अमन

'दिल्ली और दिल की दूरी खत्म करना चाहते हैं'


नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग दलों के 14 चुनिंदा नेताओं के साथ मैराथन चर्चा की। दोपहर 3 बजे शुरू हुई बैठक करीब पौने 4 घंटे तक चली। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह 'दिल्ली की दूरी' और 'दिल की दूरी' को मिटाना चाहते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। पीएम ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के बाद सूबे में विधानसभा चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता में है।

मोदी ने कहा कि वह 'दिल्ली की दूरी' और 'दिल की दूरी' को दूर करना चाहते हैं। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन हम सभी को राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों को फायदा हो। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में सभी की सुरक्षा और बेहतरी के माहौल को सुनिश्चित करने की जरूरत है।

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों को साधने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कामयाब हो गए हैं। सरकार ने 'अनुच्छेद 370' को लेकर साफतौर पर बता दिया है कि यह व्यवस्था वापस नहीं होगी। बैठक में मौजूद कांग्रेस पार्टी और दूसरे राजनीतिक दलों ने इस बात को माना है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति का दौर शुरू हुआ है। कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, जम्मू-कश्मीर में आज शांति है। सीमा भी शांत है। डीडीसी चुनाव भी हो चुके हैं। अब जल्द ही परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर वहां चुनाव कराए जाएं। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेता कविंद्र गुप्ता ने कहा, अधिकांश दलों के नेताओं ने बैठक में अपना पक्ष रखा है। खास बात ये रही कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों के नेताओं की बातें गौर से सुनीं। सभी दल इस बात पर सहमत दिखाई दिए कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल हो रही है। आतंकवाद की घटनाएं कम हो रही हैं और बॉर्डर पर सीज फायर है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाए। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, अन्य मांगों के अलावा सभी राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 के बाद जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया था, उन्हें रिहा कर दिया जाए। खास बात है कि आजाद ने यहां पर कहा, हम आतंकवादियों को रिहा करने की बात नहीं कर रहे हैं। राजनीतिक व्यक्ति, जो बेगुनाह हैं और सरकार ने उन्हें राजनीतिक भय के चलते सलाखों के पीछे रखा हुआ है, उन्हें रिहा कर दिया जाए।

आर्टिकल 370 पर नहीं हुई चर्चा

बैठक से पहले ऐसी अटकलें लग रही थीं कि गुपकार से जुड़े नेता आर्टिकल 370 के तहत सूबे को मिले विशेष दर्जे को खत्म करने का मुद्दा उठा सकते हैं। लेकिन बैठक में यह मुद्दा नहीं उठा। गुलाम नबी आजाद ने बताया कि बैठक में शामिल ज्यादातर लोगों का कहना था कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए इस पर चर्चा का कोई मतलब नहीं है। 

एक बैठक से दिल की दूरी कम नहीं होगीः उमर

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम आर्टिकल-370 पर अपनी लड़ाई अदालत में लड़ेंगे। हमने प्रधानमंत्री से भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच विश्वास को दोबारा कायम करना आपकी जिम्मेदारी है। इसके लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। जम्मू-कश्मीर को यूनियन टेरेटरी का दर्जा दिया गया है, कश्मीरी इसे पसंद नहीं करते हैं। उमर ने कहा कि प्रधानमंत्री दिल की दूरी कम करना चाहते हैं, लेकिन एक मुलाकात से न दिल की दूरी कम होती है और न दिल्ली की दूरी कम होती है। एक मीटिंग में इस बात की उम्मीद करना गलतफहमी होगी।


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