दुर्लभ पुस्तकों का होगा डिजिटलीकरण


मुंबई

मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय तथा एशियाटिक सोसायटी मुंबई में रखी दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करने के लिए दोनों संस्थाओं को 5-5 करोड़ रुपए का अनुदान की घोषणा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने की है।

सामंत ने कहा कि मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय के पुस्तालय की स्थापना एक अगस्त 1898 को हुई थी। वर्तमान में यह पुस्तकालय सरकार द्वारा अनुमोदित जिला-ए श्रेणी के पुस्तकालय के रूप में कार्य कर रहा है। पुस्तकालय में कुल 1,93,400 पुस्तकें और 5,000 प्रतियां हैं। पुस्तकालय में पांडुलिपियों, विभिन्न लेखकों के साहित्य का संग्रह है, जिन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसे देखते हुए इन दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए पांच करोड़ रुपए का विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।

मुंबई एशियाटिक सोसायटी की स्थापना 1804 में हुई थी। 1950 में राज्य सरकार ने एक राज्य मध्यवर्ती ग्रंथालय की स्थापना कर एशियाटिक सोसायटी को मध्यवर्ती पुस्तकालय की देखभाल करने का निर्देश दिया। एशियाटिक सोसायटी की स्थापना 200 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार ने दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए पांच करोड़ रुपए प्रदान किए थे। इस कार्य के दूसरे भाग के रूप में एशियाटिक सोसायटी, मुंबई को दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए पांच करोड़ रुपए का अनुदान देने का निर्णय लिया गया है।


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