एमपी के जूनियर डॉक्टर्स को मिला IMA का साथ


नई दिल्ली

मध्य प्रदेश में कोरोना के इतर जूनियर डॉक्टरों के इस्तीफा को लेकर हलचल पैदा हो गई है। अब मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मुख्यालय को प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों को बिस्तर आरक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा और वजीफा वृद्धि की मांगों के मद्देनजर राज्य नौकरशाही द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति ने चकित कर दिया है। इसके बाद आइएमए द्वारा कहा गया है कि वे उनके साथ खड़ा है और राज्य से मांगों पर गौर करने की मांग करता है। 

डॉक्टर्स को मिली थी चेतावनी

बता दें कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों को मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर द्वारा चेतावानी दी गई थी। डॉक्टर्स को कहा गया था कि उन्हें मेडिकल कॉलेज की सीट छोड़ने पर बांड के 10 से 30 लाख रुपए देने होंगे। गौरतलब है कि एक दिन पहले जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 468 जूनियर डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया, जिसके बाद यह चेतावनी दी गई थी। उधर, जूनियर डॉक्टरों से बात करने और उनके काम पर लौटने की अपील करते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा,’ माननीय हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जूडा को हड़ताल समाप्त करनी चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति से जूडा अपनी मांगों को लेकर संवाद करे। हमारे द्वार बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं।हम सब की प्राथमिकता मरीज़ों का इलाज है। वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जूनियर डाक्टरों की हड़ताल को अवैधानिक ठहराया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस सुजय पाल की युगलपीठ ने जूनियर डाक्टरों को निर्देश दिया था कि वे 24 घंटे के भीतर हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट आएं। सरकार को भी कहा गया है कि ऐसा न होने पर हड़ताली डाक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

 बीते दिन तीन हजार डाक्टरों ने दिया इस्तीफा

ग्वालियर में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक इस्तीफा दिया है। एक जूनियर डॉक्टर ने बताया था कि मध्य प्रदेश में सभी 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामुहिक इस्तीफा दिया है। ये हमारी मजबूरी है। हम अपने माननीय से अनुरोध करते हैं कि हमारी मांगे मानी जाएं।


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