मिशन 2022 के लिए भाजपा ने बनाई रणनीति

लखनऊ

पंचायत अध्यक्ष चुनावों के बाद भाजपा नए लक्ष्य की तरफ बढ़ गई है। पंचायत अध्यक्षों को किसानों को साधने का बड़ा होमवर्क दिया गया है। उन्हें विस चुनावों से पहले नाराज किसान मतदाताओं को साधना होगा। आगामी विस चुनावों के लिए पार्टी अपनी सियासी जमीन को नए सिरे से मजबूत कर रही है। पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश की 14 लोकसभा क्षेत्रों में 445 पंचायत सीटें हैं। भाजपा ने सर्वाधिक 99 पर, जबकि सपा को 85 और बसपा को 83 सीटें मिलीं। 129 निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली थी। 38 सीटों पर जीत के साथ पश्चिम में रालोद को खोई जमीन मिल गई। सिर्फ दो जिलों में भाजपा नंबर एक पार्टी बन पाई थी। अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा में मंथन तेज हुआ। पता चला कि दिसंबर 2020 से चल रहे किसान आंदोलन की वजह से ग्रामीण वोटर भाजपा से दूर हुए हैं। प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने मेरठ के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित बैठक में माना था कि पंचायत सदस्यों के टिकटों के बंटवारे में भी चूक हुई। इस बीच सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव, संगठन महामंत्री सुनील बंसल और प्रदेश प्रभारी राधा मोहन ने क्षेत्रीय कार्यालय में बैठक कर किसान आंदोलन से हुए सियासी नुकसान का आकलन किया था।


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