राम भरोसे पहाड़ियों पर बसे 21 हजार झोपड़े

मुंबई

चेंबूर और विक्रोली में रविवार को पहाड़ी खिसकने से 30 लोगों की जान चली गई। हर साल मानसून के दौरान पहड़ियां खिसकने की घटनाएं होती हैं और लोगो की जान जाती है। मनपा ने 2010 में  पहाड़ियों पर बने झोपड़ों का सर्वे कर इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी थी। साकीनाका में 2005 में पहाड़ी खिसकने की घटना के बाद पहाड़ियों पर बसी झोपड़ पट्टियों के किनारे सुरक्षा दीवार बनाने का निर्णय लिया गया था लेकिन अभी तक सुरक्षा दीवार बनाने का कोई ठोस कदम नही उठाया गया है। पहाड़ियों पर बनी झोपड़ पट्टियों के पास सुरक्षा दीवार बनाने की जिम्मेदारी झोपड़ पट्टी सुधार मंडल के पास होता है जो राज्य सरकार के अधीन आती है।

उल्लेखनीय है कि घाटकोपर के असल्फा गांव, सायन एंटोपहिल, चेंबूर, वासीनाका, भांडुप, विक्रोली पार्क साइट, कुर्ला, पवई, चांदीवली तथा जोगेश्वरी एवं मालाड पूर्व के अप्पापाड़ा आदि इलाके हैं जहां पहाड़ियों पर बड़ी संख्या में झोपड़पट्टी बन गई है। इन झोपड़ पट्टियों में लगभग 21 हजार घर हैं जिनमें लाखों लोग जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर हैं। मनपा ने वर्ष 2010 में आईआईटी के मार्फ़त मुंबई में पहाड़ियों पर बने झोपड़ पट्टियों का सर्वेक्षण किया गया था। जिसमें 291 जगहों पर पहाड़ियों पर झोपड़पट्टी पाई गई। मनपा ने इन झोपड़पट्टियों को सुरक्षित करने के लिए पहाड़ियों के आस-पास सुरक्षा दीवार बनाने का निर्देश संबंधित विभाग को दिया था। 

 

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