23 साल बाद मनपा सफाईकर्मियों की जीत

मुंबई 

मनपा सफाईकर्मियों ने लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद बड़ी जीत हासिल की है। औद्योगिक न्यायालय ने मनपा के 580 संविदा सफाईकर्मियों को मनपा में रखने का आदेश दिया है। 

गारबेज ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (बीटीडब्ल्यूयू) ने 1999 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर 580 श्रमिकों को बनाए रखने की मांग की थी। यूनियन संघर्ष के बाद इन मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, रेनकोट और गमबूट जैसे कई अधिकार दिए। अब 23 साल बाद मनपा के खिलाफ केस जीतकर कूड़ा उठाने वाले स्थायी होंगे। कचरा परिवहन श्रमिक संघ ने बताया कि वर्ष 1997 में स्वतंत्रता का 50वां वर्ष था, इसलिए मुंबई को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए मनपा ने 1996 से ठेकेदारों के माध्यम से सफाईकर्मियों को काम पर रखा था। मनपा ने इन श्रमिकों को साधारण उपस्थिति कार्ड भी नहीं दिए, साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया गया। मनपा के पत्र के अनुसार श्रमिकों को प्रतिदिन 127 रुपये का भुगतान किया जाता था, लेकिन ठेकेदार श्रमिकों को 55 से 60 रुपये देते थे और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। मनपा ने इन श्रमिकों को श्रमिक कहने के बजाय स्वयंसेवक के रूप में एक नाम दिया ताकि उन्हें श्रम कानून का कोई लाभ न मिले।  


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