पेट्रोल-डीजल से सरकार को 3.35 लाख करोड़ की कमाई


नई दिल्‍ली

पेट्रोल-डीजल से सरकार को खूब कमाई हो रही है। पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स से केंद्र सरकार की कमाई 88 फीसद तक बढ़ गई है। इस साल मार्च तक यह कमाई 3.35 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद सरकार की कमाई बढ़ी है। इस बात की जानकारी सोमवार को लोकसभा में दी गई।

पिछले साल पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 19.98 रुपए थी जिसे इस बार बढ़ाकर 32.90 रुपए कर दिया गया। कोरोना के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कई साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर चले गए थे। लॉकडाउन की वजह से गाड़ियां बंद थीं और तेलों की मांग भी घट गई थी। इस कमी को पाटने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। इसी तरह डीजल के दाम पर भी लगभग दुगने रुपए तक ड्यूटी बढ़ाई गई। पिछले साल यह ड्यूटी 15.83 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 31.80 रुपए कर दिए गए। इसके बारे में लोकसभा में पेट्रोलियम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने जवाब दिया।

इन दोनों ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से सरकार का टैक्स कलेक्शन 3.35 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। रामेश्वर तेली के मुताबिक, यह आंकड़ा अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच का है। ठीक एक साल पहले इसी अवधि में पेट्रोल-डीजल से टैक्स कलेक्शन 1.78 लाख करोड़ रुपए था जो अब बढ़कर 3.35 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। सरकार को इस मद में और भी कमाई होती, लेकिन लॉकडाउन के चलते इसमें गिरावट देखी गई। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस साल अप्रैल-जून की अवधि में सरकार को 1.01 लाख करोड़ रुपए एक्साइज कलेक्शन के रूप में प्राप्त हुए। एक्साइज से होने वाली कमाई की कड़ी में सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं बल्कि एटीएफ, प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल भी शामिल हैं। इन सबको जोड़ दें तो वित्तीय वर्ष 21 में सरकार को कुल एक्साइज कलेक्शन 3.89 लाख करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम साल 2010 से बाजार के हवाले हैं। 26 जून 2010 से पेट्रोल की कीमतें बाजार के चाल से तय होती हैं, जबकि डीजल की दर 19 अक्टूबर 2014 को पूरी तरह से बाजार के नियंत्रण में चली गई। तेल विपणन (मार्केटिंग) कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के दाम के अनुसार पेट्रोल-डीजल की रेट बढ़ाती या घटाती हैं। ये कीमतें रुपए और डॉलर के एक्सचेंज पर आधारित होती हैं। जून 2017 से पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इसी आधार पर तय होती हैं। एक्साइज ड्यूटी में जो बदलाव हुए उसमें कोई संशोधन नहीं हुआ क्योंकि कोरोना में तेलों की मांग में आई गिरावट को इससे पाटा गया।


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