देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत

संविधान के आर्टिकल 44 को लागू करने का यही सही समय


नई दिल्ली

दिल्ली हाईकोर्ट ने देश में समान नागरिक संहिता को लेकर अहम बात कही है। मीणा जनजाति की एक महिला और उसके हिंदू पति के बीच तलाक के मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत है और इसे लाने का यही सही समय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा है।

इस केस में पति हिंदू मैरिज एक्ट के हिसाब से तलाक चाहता था, जबकि पत्नी का कहना था कि वह मीणा जनजाति की है, ऐसे में उस पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू नहीं होता। पत्नी ने मांग की थी कि उसके पति की तरफ से फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी खारिज की जाए। उसके पति ने हाईकोर्ट में पत्नी की इसी दलील के खिलाफ याचिका लगाई थी। संविधान के भाग 4 में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का ब्योरा है। संविधान के आर्टिकल 36 से 51 के जरिए राज्य को कई मुद्दों पर सुझाव दिए गए हैं। 

धर्म, जाति के अंतर खत्म हो रहे: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में जाति, धर्म और समुदाय से जुड़े फर्क खत्म हो रहे हैं। इस बदलाव की वजह से दूसरे धर्म और दूसरी जातियों में शादी करने और फिर तलाक होने में दिक्कतें आ रही हैं। आज की युवा पीढ़ी को इन दिक्कतों से बचाने की जरूरत है। इस समय देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। आर्टिकल 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो बात कही गई है, उसे हकीकत में बदलना होगा।


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