खतरा अभी बना हुआ है

देश में रोजाना संक्रमण के मामले भले पचास हजार से नीचे आ गए हों, लेकिन दूसरी लहर का खतरा अभी बना हुआ है। महामारी से निपटने के लिए बनाए गए उच्चस्तरीय मंत्री समूह ने भी अब इस बात की पुष्टि कर दी है कि दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है। फिलहाल राहत इतनी ही है कि संक्रमण फैलने की रफ्तार कम पड़ी है। सक्रिय मामलों की संख्या अभी भी साढ़े पांच लाख से ऊपर है। ऐसे में यह मानना कि खतरा कम पड़ गया है, बड़ी भूल होगी। चिंता की बात तो यह है कि देश के अस्सी जिलों में संक्रमण की दर कम नहीं पड़ी है। ये जिले महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक सहित कुछ राज्यों के हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि ये जिले देश में संक्रमण फैलाने का फिर से बड़ा कारण बन सकते हैं। अब खतरा इसलिए भी ज्यादा है कि कई राज्यों ने अपने यहां प्रतिबंध हटा लिए हैं। महानगरों में मेट्रो सहित परिवहन के तमाम साधन शुरू कर दिए गए हैं। ऐसे में संक्रमण कब कहां जोर पकड़ ले, कुछ नहीं कहा जा सकता। भारत का संकट इसलिए भी ज्यादा विकट है कि तीसरी लहर का खतरा सामने है। कोरोना विषाणु के डेल्टा प्लस रूप के मामले जिस तेजी से बढ़े हैं, वे भी चिंता बढ़ा रहे हैं। अब तक 12 राज्यों में पचास से ज्यादा मामले मिल चुके हैं। बताया जा रहा है कि विषाणु का यह रूप संक्रमण फैलाने और मारक क्षमता में डेल्टा रूप से आठ गुना ज्यादा घातक है। ऐसे में अगर डेल्टा प्लस विषाणु तीसरी लहर का कारण बना तो लेने के देने पड़ सकते हैं। इस खतरे को भांपते हुए ही महाराष्ट्र सरकार ने अपने यहां फिर से सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं।

 मुश्किल यह भी है कि जिन बारह राज्यों में डेल्टा प्लस के मामले मिले हैं, उनमें कितने लोगों तक यह संक्रमण फैल चुका होगा, इसका अभी कोई अनुमान नहीं लगाया जा सका है। इस खतरे को देखते हुए ही केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते राज्यों को परामर्श जारी किया था कि वे डेल्टा प्लस के खतरे से निपटने को तैयार रहें। सरकार ने इसे चिंताजनक विषाणु की श्रेणी में रखा है। जाहिर है, अगर तीसरी लहर आई, जैसी कि प्रबल आशंका है, तो संकट कहीं ज्यादा विकराल रूप धारण कर जाएगा। जहां तक टीकाकरण का सवाल है, भारत में अब तक तैंतीस करोड़ लोगों को टीका लग चुका है। मुश्किल यह है कि देश के पास टीकों का भारी अभाव है। इसलिए लोगों को टीकाकरण के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कहने को इक्कीस जून को टीकाकरण का बड़ा अभियान शुरू किया गया। उस दिन पिच्यासी लाख लोगों को टीका लगाने का दावा भी किया गया। लेकिन उसके अगले ही दिन यह आंकड़ा बरकरार नहीं रखा जा सका। तब से अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ जब अस्सी लाख लोगों को टीका लगा हो। अभी यह भी पता नहीं है कि डेल्टा और डेल्टा प्लस संक्रमण को रोकने में भारत में उपलब्ध देशी-विदेशी टीके कितने प्रभावी हैं। लेकिन इतना दावा जरूर है कि जिन लोगों को टीका लग चुका है, उन्हें संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षा मिल जाएगी। इसलिए सबसे ज्यादा जोर टीकाकरण पर है। इस वक्त कोरोना विषाणु में सैकड़ों बदलाव देखे जी चुके हैं। इसलिए दुनिया में जितने भी टीके हैं, उनका प्रभाव सामने आने में वक्त लगेगा। ऐसे में सिर्फ एक ही उपाय है कि टीकाकरण के बाद भी दोहरे मास्क और हाथ धोने सहित बचाव के सारे उपाय हों। तभी हम महामारी से जीत पाएंगे।


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