‘शैक्षणिक गुणवत्ता को खत्म करने का प्रयास’

मुंबई

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय की तरफ से महाविकास आघाड़ी सरकार की शिक्षा नीति को लेकर सख्त टिप्पणी की जा रही है, लेकिन सरकार जानबूझकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता को कम कर रही है। उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार तत्काल स्कूलों की फीस को सुनिश्चित करके विद्यालयों पर अंकुश लगाए। वे प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे। उपाध्ये ने कहा कि हाल ही में उच्च न्यायालय ने अपनी सख्त टिप्पणी में सरकार से कहा था कि आपने शिक्षा को मजाक बना दिया है। हाईकोर्ट की खिंचाई के बावजूद सरकार शिक्षा नीति में सुधार की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। विद्यालय कब और किस तरह से शुरू होंगे,  निजी विद्यालयों द्वारा अनावश्यक ली जा रही फीस, पाठ्यक्रमों में भ्रम की स्थिति, दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन कैसे करेंगे, इस तरह से किसी भी मुद्दे पर सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। इसलिए अब यह प्रश्न उपस्थित होता है कि मुख्यमंत्री शिक्षा के विषय को लेकर कोई गंभीर हैं या नहीं? उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों के संचालक अनावश्यक शुल्क लेकर अभिभावकों को लूट रहे हैं। राइट टू एजुकेशन कानून के अनुसार दिए जाने वाले प्रवेश को भी अनेक विद्यालयों ने मना कर दिया है। बारहवीं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा, इसकी अभी तक स्पष्ट नहीं है।


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