तूफानी बारिश ने ढाया कहर, मुंबई गई ठहर


मुंबई 

शनिवार देर रात मुंबई शहर व आसपास के इलाकों में मूसलाधार बरसात शहर पर कहर बन कर टूटी, जिसके चलते चेंबूर के वाशीनाका में 18, विक्रोली में पांच भांडुप में एक युवक की मलबे में दबने से मौत हो गई। भारी बारिश के चलते चेंबूर में सुरक्षा दीवार पास के पांच से सात झोपड़ों पर गिर गई। यह हादसा तब हुआ जब लोग गहरी नींद में थे। अचानक गिरी दीवार से किसी को बचने का मौका ही नहीं मिला। सभी उसमें जिंदा दफन हो गए। माहुल में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इसमें मीना सूर्यकांत झिमुर, पं. राम गोरसे, शीला गौतम पारधे, शुभम गौतम पारधे, श्रुति पारधे, मुकेश जय प्रकाश अग्रहरी, जीजाबाई तिवारी, पल्लवी दुपारगड़े, खुशी सुभाष ठाकुर, एक अज्ञात, सूर्यकांत रविन्द्र झिमुर, उर्मिला ठाकुर, छाया पंडित गोरसे, अपेक्षा सूर्यकांत झिमुर, प्राची पंडित गोरसे शामिल हैं, जबकि संजय गायकवाड़, विजय खरात, अक्षय सूर्यकांत झिमुर, लक्ष्मी आबाजी गंगावने व विशाखा आबाजी गंगावने जख्मी बताए जाते हैं।


घटना की जानकारी मिलते ही मनपा के संबंधित विभाग अधिकारी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिया। इसमें राज्य एनडीआरएफ के साथ अग्निशमन दल, स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच कर बचाव व राहत काम में लगे थे। इसी तरह विक्रोली पार्क साइट इलाके के सूर्या नगर स्थित पंचशील चाल के चार से पांच घर भारी बरसात के चलते धराशायी हो गए, जिसमें छह लोगों की मौत होने की जानकारी है। भांडुप वन विभाग से सटे एक मकान पर सुरक्षा दीवार गिरने से एक युवक के जान जाने की भी जानकारी मिली है। राजावाड़ी अस्पताल के आरएमओ डॉ. रविन्द्र के अनुसार विक्रोली की घटना में मरने वालों का नाम अंकित रामनाथ तिवारी, रामनाथ तिवारी, आशीष विश्वकर्मा, प्रिंस हंसराज विश्वकर्मा व सविता देवी रामनाथ तिवारी बताया जाता है। इसी तरह भांडुप में एक व्यक्ति की जान गई है। चेंबूर में मलवे के नीचे कुछ अन्य लोगों के दबे होने की बात की जा रही है। खबर लिखे जाने तक एनडीआरएफ टीम युद्ध स्तर पर मलवे को हटाने में लगी थी। इन हादसों में घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में किया जा रहा है।

10 साल से चल रहे भूस्खलन का कोई हल नहीं

मुंबई में भूस्खलन के कारण जानमाल और आर्थिक नुकसान कोई नई बात नहीं है। राज्य सरकार पिछले 10 वर्षों से भूस्खलन के हादसे को नियंत्रित करने के लिए गंभीर नहीं है। पिछले 29 सालों में भूस्खलन हादसों में 290 लोगों की मौत हुई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मुंबई की 36 में से 25 विधानसभा की सीटों पर 257 जगहों को पहाड़ी इलाकों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई स्लम इम्प्रूवमेंट बोर्ड ने राज्य सरकार को प्राथमिकता के आधार पर 22,483 झोपड़ियों में से 9657 झोपड़ियों को स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। पहाड़ियों के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाकर शेष झोपड़ियों की सुरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया था। गलगली ने इससे पहले महाराष्ट्र सरकार को मानसून के दौरान 327 जगहों पर भूस्खलन की वजह से चेतावनी दी थी। वर्ष 1992 से 2021 के बीच भूस्खलन के हादसे में 290 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। मुंबई स्लम इम्प्रूवमेंट बोर्ड ने स्थानांतरण करने की सिफारिश की थी। 2010 में एक व्यापक सर्वेक्षण किया था। अगर उसी समय पर कार्रवाई की जाती, तो पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की मौत को रोका जा सकता था। बोर्ड की रिपोर्ट और अनिल गलगली के पत्र व्यवहार के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक सितंबर 2011 को एक कार्य योजना तैयार करने का आदेश नगर विकास विभाग को दिया था। तब से दस साल बीत चुके हैं, लेकिन नगर विकास विभाग अभी भी इस पर काम ही नहीं शुरू किया है। पहाड़ी के किनारे 291 जगहों पर अपनी जान की परवाह किए बिना लोग रहते हैं, जिनमें से 200 से अधिक स्थान कुर्ला से मुलुंड के बीच है। 132 स्थान तो विक्रोली से भांडुप पश्चिम में हैं। जबकि घाटकोपर में 32 ऐसे स्थान हैं, जहां पर लोग पहाड़ियों के किनारे अपनी जान हथेली पर रखकर रहते हैं। पिछले साल मलबार हिल परिसर में पहाड़ी खिसकने की घटना घटी थी, लेकिन इसमें कोई जनहानि नही हुई थी। मनपा प्रशासन हर साल मानसून पूर्व पहाड़ियों के किनारे रहने वाले लोगो को सिर्फ चेतवानी देने का काम करती है। मनपा पहाड़ियों पर रहने वाले लोगों को सावधान करते हुए उन्हें मानसून पूर्व सुरक्षित स्थान पर जाने की चेतावनी देती है। कुर्ला में पहाड़ी खिसकने के 18 स्थान है। मुलुंड में पांच स्थान है। जबकि देवनार में 11 मालाड में 18 और मलबारहिल ताड़देव परिसर में 16 स्थान हैं। घाटकोपर से लेकर भांडुप पश्चिम का पूरा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र हॉटस्पॉट है। मुंबई में पहाड़ी खिसकने की दुर्घटना इसके पहले साकीनाका में वर्ष 2005 में घटी थी जिसमे 75 लोगों की जान गई थी। इसी तरह घाटकोपर चिराग नगर में वर्ष 2000 में पहाड़ी खिसकने से हुई दुर्घटना में 70 लोगों की जान गई थी, जबकि मालाड में मनपा की जल कुंभ की दीवार गिरने से 30 लोगों की जान चली गई थी।

अनहोनी को टालने  के लिए रहें अलर्ट : सीएम

मुंबई। भारी बारिश के कारण घटी दुर्घटना दोबारा न घटे इसके लिए मुंबई मनपा सहित संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। रविवार को वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मुंबई मनपा और अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे ने यह बात कही। उन्होंने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे मौसम विभाग द्वारा दी गई चेतावनी के मद्देनजर अपेक्षित और अप्रत्याशित दुर्घटनाओं के मामले में सतर्क रहें और समन्वित तरीके से काम करें। सीएम ठाकरे ने मुंबई में भारी बारिश की  स्थिति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने दिया महत्वपूर्ण सुझाव

मुख्यमंत्री ठाकरे ने अधिकारियों को सुझाव देते हुए कहा कि शनिवार की रात जैसी दोबारा मुंबई में दुर्घटना न घटे इसके लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष कर मुंबई मनपा को निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर कोरोना मरीजों को भर्ती कराया गया है उस कोविड सेंटर पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। 


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