परमबीर की याचिका पर फैसला सुरक्षित

parambir singh

मुंबई 

परमबीर सिंह ने जांच से छुटकारा पाने के लिए कानून का दुरुपयोग करने वाली याचिका दायर की है। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार मुंबई उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि उनकी याचिका को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया जाना चाहिए।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर की गई दो प्रशासनिक जांच के खिलाफ सिंह ने याचिका दायर की है। न्यायाधीश संभाजी शिंदे और निजामुद्दीन जमादार की बेंच के सामने सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता दरयास खंबाटा ने परमबीर की याचिका को खारिज करने की मांग की। वहीं परमबीर ने कहा है कि 'मैंने तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसे लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था, इसलिए मुझसे बदला लेने के लिए मुझे निशाना बनाया जा रहा है और मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। इस पर खंबाटा ने कहा कि इस तरह का तर्क देकर परमबीर अपने खिलाफ हर शिकायत से निजात पाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से पहले ही पुलिस अधिकारी अनूप डांगे ने दो फरवरी को उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। जांच की प्रगति के बारे में अदालत द्वारा पूछने पर अतिरिक्त लोक अभियोजक जयेश याज्ञनिक ने अदालत को बताया कि दोनों मामलों में जांच अभी जारी है। परमबीर के वकील महेश जेठमलानी ने दावा किया कि उन्हें जांच के संबंध में कोई समन या नोटिस नहीं मिला है, जिसके बाद मुंबई हाईकोर्ट ने परमबीर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

6 अगस्त तक गिरफ्तारी से राहत 

वहीं दूसरे मामले में परमबीर सिंह और राज्य की पूर्व खुफिया आयुक्त रश्मि शुक्ला की याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही। न्यायाधीश संभाजी शिंदे और निजामुद्दीन जमादार की पीठ ने अगली सुनवाई छह अगस्त को तय की है। राज्य सरकार ने कहा कि छह अगस्त तक परमबीर सिंह और रश्मि शुक्ला की गिरफ्तारी नहीं होगी।


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