पेगासस के नाम पर देश को बदनाम करने की साजिश: फड़नवीस


मुंबई

विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने विपक्ष पर पेगासस के नाम पर भारत सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेलीग्राफ एक्ट को और मजबूत बनाया है, जिससे इसका दुरुपयोग करने वालों पर कठोर सजा दी जा सकती है। पेगासस फोन टेपिंग की जांच के लिए जेपीसी जांच की जरूरत नहीं है।

देवेंद्र फड़नवीस ने मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों को बताया कि पेगासस फोन टेपिंग मामले में 45 देशों के नाम हैं, लेकिन संसद की कार्रवाई शुरू होने से ठीक एक दिन पहले जिस तरीके से इसे मीडिया में पब्लिश किया गया और विपक्ष मामले को लेकर संसद की कार्रवाई को डिरेल करने का प्रयास कर रहा है, उससे इस मामले में विपक्ष की मंशा को लेकर संदेह उत्पन्न हो जाता है। फड़नवीस ने कहा कि जब-जब भारत विकास के मार्ग पर आगे जाने लगता है, तब -तब देश विरोधी ताकतें उसे पीछे धकेलने के लिए इस तरह का प्रयास करती रहती हैं। मेगासस फोन टेपिंग मामला भी इसी साजिश का नतीजा लग रहा है। देवेंद्र फड़नवीस ने कहा फोन टेपिंग का मामला कोई नया नहीं है। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता अमर सिंह ने 2006 में फोन टेपिंग का मामला संसद में उठाया था। इसी तरह 2009 में ममता बनर्जी ने भी फोन टेपिंग का मामला संसद में उठाया था। वर्ष 2010, 2011 व 2012 में भी संसद में फोन टेपिंग का मामला उठ चुका है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि फोन टेपिंग राष्ट्रीय सुरक्षा, मनी लॉड्रिंग व विशिष्ठ सुरक्षा मामलों में टेलग्राफ एक्ट के तहत किया जाता है, इसमें कुछ गैर नहीं है। फड़नवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया है, इससे विपक्ष बौखला गया है। इसीलिए संसद में जनहित के मुद्दों पर चर्चा रोकने के लिए पेगासस फोन टेपिंग के नाम पर सदन का कामकाज चलने नहीं दे रहा है।


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