करोड़ों खर्च करने के बाद भी हर साल डूब रही मुंबई


मुंबई 

बाढ़ और जलजमाव से जनता को बचाने के लिए मनपा ने चितले समिति का गठन किया था। समिति ने वर्ष 2008 में मुंबई में कुल आठ स्थानों पर बारिश का पानी निकालने के लिए पंपिंग स्टेशन स्थापित करने का सुझाव दिया था। इनमें से हाजी अली, इरला, लवग्रोव, क्लीवलैंड, ब्रिटानिया और गजधरबांध, छह पंपिंग स्टेशन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन मोगरा और माहुल में पंपिंग स्टेशन का काम 12 साल बाद भी लंबित पड़ा हुआ है। पंपिंग स्टेशन के वार्षिक रखरखाव पर अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसका उपयोग शून्य रहा है। हिंदमाता के ब्रिटानिया पंपिंग स्टेशन पर 115 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी बारिश के पानी को डायवर्ट करने के लिए अलग से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पंपिंग स्टेशन के काम में भले ही करोड़ों रुपये खर्च किए गए हों, लेकिन जलजमाव को दूर नहीं किया जा सका है।

छह पंपिंग स्टेशनों पर 665 करोड़ रुपए खर्च

तैयार हो चुके छह पंपिंग स्टेशनों में से पहले चरण में हाजीअली, लवग्रोव, क्लीवलैंड और इरला पंपिंग स्टेशनों को संचालित करना था, जबकि दूसरे चरण में ब्रिटानिया, मोगरा, माहुल खाड़ी और गजधरबांध पंपिंग स्टेशन शामिल थे। मोगरा और माहुल को छोड़कर सभी पंपिंग स्टेशन शुरू कर दिए गए हैं। नियमित रखरखाव का ठेका देने के अलावा इन छह पंपिंग स्टेशनों के निर्माण पर अब तक 665 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

सायन, हिंदमाता में समस्या जस की तस

हिंदमाता परिसर के बारिश का पानी निकालने के लिए अतिरिक्त खर्च के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ट्रैफिक जाम के चलते बाबासाहेब आंबेडकर रोड पर हिंदमाता फ्लाईओवर और परेल फ्लाईओवर के बीच सड़क की ऊंचाई 1.2 मीटर बढ़ा दी गई। इस एलिवेटेड रूट के लिए जहां करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं इस क्षेत्र में ओवरफ्लो हो रहे पानी को निकालने के लिए 15 पंप लगाए गए हैं। इसके लिए 39 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कई भूमिगत टैंक स्थापित किए गए हैं, जिस पर भी अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हिंदमाता में पानी भरने की समस्या खत्म नहीं हुई है। मातोश्री में जमा होने वाले पानी निकासी के लिए 11 करोड़ की लागत से मिनी पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। इसी क्रम में माटुंगा के गांधी मार्केट में मिनी पंपिंग स्टेशन बनाया गया। लेकिन यह पंपिंग स्टेशन चालू होने के बाद भी इसका प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा है। 

इस पर खर्च किए गए 14 करोड़ रुपये प्रशासन की जीरो प्लानिंग के चलते बर्बाद हो गए हैं। ब्रिमस्टोवाड परियोजना के दूसरे चरण में मोगरा नाला पंपिंग स्टेशन के काम का प्रस्ताव रखा था।


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