'कोई भी गंभीर संपर्क पहल एकतरफा नहीं हो सकती'


नई दिल्ली

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ताशकंद में एक क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि संपर्क निर्माण में विश्वास आवश्यक है, क्योंकि यह एकतरफा नहीं हो सकता और संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में इसके मूलभूत सिद्धांत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संपर्क प्रयास आर्थिक व्यवहार्यता एवं वित्तीय दायित्व पर आधारित होने चाहिए तथा इनसे कर्ज का भार उत्पन्न नहीं होना चाहिए। जयशंकर की इस टिप्पणी को परोक्ष रूप से चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (बीआरआई) के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी गंभीर संपर्क पहल एकतरफा नहीं हो सकती तथा वास्तविक मुद्दे मनोवृत्ति के हैं, न कि विवाद के। विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे संपर्क से किसी को लाभ नहीं होने वाला जिसमें सिद्धांत की बात की जाए, लेकिन आचरण इसके विपरीत हो। बीआरआई की वैश्विक निंदा होती रही है, क्योंकि इसके चलते कई देश चीन के कर्ज तले दब गए हैं। जयशंकर ने कहा कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच संपर्क को विस्तारित करते समय सिर्फ भौतिक अवसंरचना को ही नहीं, बल्कि इसके सभी आयामों को देखने की आवश्यकता है। 


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