एअरपोर्ट की पार्किंग में खड़ी टैक्सियों की नीलामी

42 परिवारों के सामने पैदा हुआ रोजगार का संकट    भाजपा नेता अमरजीत सिंह ने कहा, न्याय मिलने तक करेंगे संघर्ष  


मुंबई

टैक्सी वालों को लॉकडाउन की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ जहां उनके पास धंधा नहीं है, वहीं दूसरी तरफ पार्किंग में खड़ी इनकी गाड़ियां भंगार में बेच दी गई है। कानून की आड़ में छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट अंधेरी के पार्किंग में खड़ी 42 गाड़ियों को भंगार में बेच दिया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है की सभी लीगल कार्रवाई को पूरी करने के बाद इन टैक्सियों की नीलामी की गई है। जबकि मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कहा कि टैक्सी वालों को जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा। इन्हे न्याय दिलाने के लिए जहां भी जाना होगा हम जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि जरूरी हुआ तो पीआईएल भी दाखिल की जाएगी।  

 टैक्सी वालों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते जब धंधा नहीं रह गया, तब टैक्सी पार्किंग में खड़ी कर गांव चले गए। लेकिन जब जून में वापस आए तो उनके गाड़ियों की नीलामी हो चुकी थी। आरोपों के मुताबिक पूरे एयरपोर्ट का ठेका जब जीवीके कंपनी के पास था तभी मार्च 2020 में लॉकडउन की घोषणा के बाद टैक्सी चालकों ने अपनी टैक्सी यहां पर खड़ी की थी। टैक्सी चालक कृष्णकांत पांडे जब अपनी टैक्सी लेने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्टैंड पर पहुंचे तब उन्होंने देखा कि उनकी टैक्सी, ट्रकों में भरी जा रही थी। 

इसी तरह यहां खड़ी कुल 42 टैक्सियों को भंगार में बेच दिया गया है। टैक्सी चालक संजय माली ने बताया कि उनकी टैक्सी मार्च 2020 से एयरपोर्ट की पार्किंग में खड़ी थी, लेकिन मई में जब वे मुंबई आए और अपनी टैक्सी देखने गए तो उन्हें गाड़ियों की नीलामी के बारे में पता चला. उन्होंने छह जून को एक पत्र लिखकर एअरपोर्ट विभाग को दिया जहां उन्हें उनकी गाड़ी वापस करने का आश्वासन दिया गया. लेकिन, तीन दिन बाद जब वे वापस पहुंचे तो देखा कि उनके गाड़ी से गैस का सिलेंडर निकाला जा रहा था। 

भारतीय टैक्सी चालक संघ के अध्यक्ष राकेश मिश्र ने बताया कि उन्होंने पहले जीवीके और अब अडानी अधिकारियों को बताया था कि यह सभी टैक्सी चालक अपने गांव गए हैं, जैसे ही लौट आएंगे सारी गाड़ियां निकाल लेंगे। इसके बावजूद टैक्सियों को भंगार में बेचने की कार्रवाई की गई। अडानी के अधिकारी सुधीर लांबा ने बताया कि यहां कोई पार्किंग नहीं है, बल्कि यहां पर टैक्सियों को ठहरने के लिए जगह दिया गया था। जबकि यहां पर लोग टैक्सी पार्क कर चले गए, क्योंकि यह उच्च स्तरीय सेंसिटिव इलाका है, इससे यहां खड़ी गाड़ियों को हटाना था, इसलिए उन्हें भंगार में बेच दिया गया।

2200 टैक्सियां पार्क की गई थी

लांबा ने बताया कि यहां पर कुल 2200 टैक्सी खड़ी की गई थी। सभी का नंबर लेकर हमने उनके के मालिक से संपर्क करने की कोशिश किया, जिन लोगों से संपर्क हुआ उन्हें पूरी जानकारी दी गई. इसके अलावा सभी का पता हासिल कर उनके घर पर एक पत्र भी टैक्सी हटाने को लेकर भेजा गया। सभी गाड़ियां यहां से हट गई, इसके बाद 48 टैक्सी यहां पर खड़ी थी. इसके बाद हमने इन गाड़ियों के नीलामी की निविदा और पेपर नोटिस निकाली, जिसके बाद छह और लोगों ने हमसे संपर्क किया। जिसके बाद उन लोगों को भी टैक्सी लौटा दी गई। इसके बाद हमने वहां खड़ी 42 गाड़ियों की नीलामी कर दी। जिसकी बकायदा बोली लगाई गई थी, बोली के बाद इन टैक्सियों को उसे खरीदने वाले के हवाले कर दिया गया।


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