उत्साहवर्द्धक परिणाम

भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के नकारात्मक प्रभाव से त्रस्त तो है, लेकिन ठोस आधारों के कारण निवेश एवं निर्यात में उत्साहवर्द्धक वृद्धि हो रही है। वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 95.36 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात हुआ है, जो एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में हुए निर्यात में 85 प्रतिशत की बड़ी उछाल आई है। अप्रैल-जून, 2020 में यह आंकड़ा 51.44 अरब डॉलर रहा था। उल्लेखनीय है कि पिछले साल की तरह इस वर्ष भी अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी के भयावह प्रकोप को झेलना पड़ा था। महामारी से उत्पन्न स्थितियों के कारण आयात में भी बढ़त स्वाभाविक है, जिसकी वजह से जून में व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हुई, लेकिन आयात से यह भी इंगित होता है कि घरेलू उद्योग व बाजार में मांग बढ़ रही है। इससे उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और वित्त वर्ष के शेष हिस्से में भी निर्यात के मोर्चे पर उत्साहवर्द्धक परिणाम आएंगे। हमें याद करना चाहिए कि पिछले साल जून में सब कुछ ठप होने के चलते आयात न के बराबर हुआ था, जिसके कारण व्यापार अधिशेष हासिल हुआ था। इसी विश्वास के आधार पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इस वर्ष कुल निर्यात का आंकड़ा 400 अरब डॉलर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। पहली तिमाही की उपलब्धि को देखते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करना बड़ी चुनौती नहीं है। महामारी की दूसरी लहर अब बहुत कमजोर है तथा टीकाकरण अभियान जोरों पर है। लगभग डेढ़ साल के अनुभवों के आधार पर तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए तैयारी भी की जा रही है। देश के बड़े हिस्से से पाबंदियों को हटाया जा चुका है और औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं। निर्यात में वृद्धि से यह भी इंगित होता है कि पिछले साल महामारी के कहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रारंभ किया था, वह सही दिशा में अग्रसर हैं। इस अभियान का लक्ष्य भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में मजबूत स्थिति में लाना है।

इसके तहत भारतीय उद्योगों और उद्यमों को न केवल बड़े पैमाने पर राहत दी गई है, बल्कि नियमन में बदलाव कर कारोबार करने को सुगम बनाने का प्रयास भी किया गया है। राहत पैकेजों के अलावा बजट में तथा कुछ दिन पहले नई घोषणाओं में आर्थिकी को विस्तार देने के उपाय किए गए हैं। इन उपायों से अर्थव्यवस्था के भविष्य में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों की राय है कि मैकेनिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल साजो-सामान, खेल से जुड़ीं चीजें, खिलौने, खेती के कुछ उत्पाद ऐसे क्षेत्र हैं, जहां निर्यात बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं हैं। तकनीक, खासकर डिजिटल तकनीक और वित्तीय उपलब्धता के विस्तार ने भी निर्यात को बड़ा आधार दिया है। इन आयामों को प्राथमिकता देकर और नीतियों पर अमल कर निर्यात लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। हाल ही में ‘कोरोना वायरस महामारी और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर इसके प्रभाव’ के अध्ययन ने इस तथ्य को उजागर किया है कि इस महामारी ने सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है तथा भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है। यह वायरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है। इन दो अर्थव्यवस्थाओं, जिन्हें वैश्विक आर्थिक इंजन के रूप में जाना जाता है, संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है।


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