मॉनसून सत्र में सरकार की अग्निपरीक्षा

मराठा, ओबीसी सहित कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी,  कोरोना के नाम पर लोकतंत्र काे खत्म कर रही है सरकार : फड़नवीस

fadanvis

मुंबई 

आज से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में सरकार की अग्निपरीक्षा होने वाली है। सत्र की शुरुआत से पहले ही सरकार के खिलाफ विपक्ष आक्रामक हो गया है। अधिवेशन की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार परिषद में विपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने विभिन्न मुद्दों को लेकर महाविकास आघाड़ी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थापना के बाद 60 साल तक जो नहीं हुआ वो इस सरकार के कार्यकाल में हो रहा है। कोरोना के नाम पर लोकतंत्र को ख़त्म करने का काम सरकार कर रही है। फड़नवीस ने कहा कि सदन में सदस्य अपनी बात न रख सकें इसलिए सरकार ने दो दिन का सत्र आयोजित किया है।

आठ सत्र में सिर्फ 38 दिन ही कामकाज

फड़नवीस ने कहा कि सरकार के कार्यकाल में अब तक कुल सात सत्र ही आयोजित किए गए हैं। इसमें कुल 36 दिन कामकाज हुआ है। अब आठवां अधिवेशन दो दिन का है। महाविकास आघाड़ी के कार्यकाल में आयोजित आठ सत्र में सिर्फ 38 दिन सदन की कार्यवाही हुई है, जो राज्य के हित के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि एक भी सत्र पांच दिन का आयोजित नहीं किया गया। कोविड काल में भी संसद का मानसून सत्र 69 दिन का आयोजित किया गया है।

सदस्यों के प्रश्नों का नहीं मिलेगा जवाब  

देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं को प्रश्नोत्तर काल एवं ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सदन में उठाने वाले सदस्यों को न्याय नहीं मिलेगा। क्योंकि सत्र में आधे घंटे भी प्रश्न-उत्तर की चर्चा नहीं होगी। प्रश्नों का उत्तर लिखित में दिया जा सकता था। लेकिन सभी सवालों के समाधान का फैसला नहीं लिया गया। देश का महाराष्ट्र इकलौता राज्य है, जहां ओबीसी समाज का  राजनीतिक आरक्षण रद्द हुआ है। मराठा, ओबीसी समाज आरक्षण सहित विभिन्न मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरते हुए फड़नवीस ने कहा कि ओबीसी समाज के आरक्षण को लेकर इम्पीरिकल डेटा को इकट्ठा करने के लिए केंद्र सरकार ने आदेश जारी किया है। पिछले कई महीनों से भाजपा यही मांग कर रही थी, लेकिन उस समय राज्य सरकार केंद्र से इम्पीरिकल डेटा मांग रही थी। मराठा आरक्षण और किसानों के मुद्दों पर राज्य सरकार गंभीर नहीं है। राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित होने वाली चाय पार्टी को सरकार द्वारा रद्द किए जाने पर फड़नवीस ने कहा कि इससे राज्य का विकास नहीं होगा।

न्यायालय के आदेश पर हो रही कार्रवाई

राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख और चीनी कारखाने पर केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा की जा रही कार्रवाई पर लग रहे आरोप को निराधार बताते हुए फड़नवीस ने कहा कि यह सभी कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश पर की जा रही है न कि किसी के दबाव में या मांग पर। विपक्ष में होने कारण हमारी भूमिका है, किसी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की जांच की मांग करना, जो हम बखूबी निभा रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल द्वारा गृह मंत्री अमित शाह को राज्य में कई चीनी मिलों की जांच की मांग को लेकर लिखे गए पत्र के सवाल का जवाब देते हुए फड़नवीस ने कहा कि इन सभी मिलों में भ्रष्टाचार हुआ है, ऐसी चर्चा है। विपक्ष का होने के कारण पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने जांच की मांग की है।

सड़क पर उतरकर रखेंगे अपनी बात

फड़नवीस ने कहा कि राज्य में ओबीसी आरक्षण, मराठा आरक्षण, किसानों के सवाल, कोरोना के सवाल, लॉकडाउन जैसे कई सवाल हैं। इसलिए हमें अब अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा। सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार परिषद में देवेंद्र फड़नवीस के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल, पूर्व वित्त मंत्री सुधीर मुनंगटीवार, नितेश राणे सहित भाजपा के विधायक उपस्थित थे।

सत्र की पूर्व संध्या पर भाजपा विधायकों की बैठक

सोमवार से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर दादर स्थित मुंबई भाजपा कार्यालय में भाजपा विधायकों की बैठक आयोजित की गई। देवेंद्र फड़नवीस की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में राज्य सरकार को घेरने के लिए चर्चा की गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सदन के बाहर और भीतर सरकार को मराठा, ओबीसी समाज आरक्षण के साथ -साथ राज्य की कानून -व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को किस तरह घेरा जाएगा इसको लेकर रणनीति बनाई गई।


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