जम्मू-कश्मीर में बढ़ेंगी सात सीटें

आयोग ने कहा- अगले साल मार्च तक पूरा होगा परिसीमन

sushil chandra

श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए परिसीमन आयोग ने शुक्रवार को कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया अगले साल मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 सीटें होंगी। उन्होंने कहा कि हमें अनुसूचित जाति के लिए भी सीटें रिजर्व करनी हैं। ऐसा पहली बार होगा। आयोग ने राजनीतिक दलों और जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से भी बातचीत की है।

सुनील चंद्रा ने कहा- जम्मू और कश्मीर का परिसीमन का पुराना इतिहास रहा है। 1951 में यहां 100 सीटें थीं। इनमें से 25 सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में थीं। पहला फुल फ्लैश्ड डीलिमिटेशन कमीशन 1981 में बनाया गया, जिसने 14 साल बाद 1995 में अपनी रिकमंडेशन भेजीं। ये 1981 की जनगणना के आधार पर थी। इसके बाद कोई भी परिसीमन नहीं हुआ।

2020 में परिसीमन आयोग को 2011 की जनगणना के आधार पर डीलिमिटेशन प्रोसेस पूरी करने के लिए निर्देश दिए गए। इस परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में 7 और सीटें बढ़ जाएंगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि परिसीमन कोई गणितीय प्रक्रिया नहीं है, जिसे मेज पर बैठकर पूरा किया जा सके। इसके जरिए समाज की राजनीतिक उम्मीदों और भौगोलिक परिस्थितियों को दिखाया जाना चाहिए।

PDP परिसीमन के खिलाफ

6 जुलाई को जम्मू पहुंचने के बाद आयोग के सदस्यों ने अनंतनाग जिले के पहलगाम का दौरा किया था। वहां उन्होंने दक्षिण कश्मीर क्षेत्र के राजनेताओं से बातचीत की। इसमें राजनेताओं ने अपने-अपने दलों के विचारों को दोहराया। इसके बाद आयोग के सदस्यों ने श्रीनगर में चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक की।

PDP और ANC ने आयोग से चर्चा नहीं करने का फैसला लिया है। दोनों ही पार्टियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए। नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, माकपा, अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस इसके लिए तैयार हैं। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और माकपा ने मांग की है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होना चाहिए।


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