दलहन पर स्टॉक लिमिट नुकसानदेह


मुंबई

 दलहन के स्टॉक नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये नए कानून का विरोध शुरू हो गया है,इसके विरोध में देश की अधिकांश मंडियों ने हड़ताल भी शुरू कर दी है।पूरे देश के लगभग दस करोड़ व्यापारियों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। बता दें कि सरकार ने  दो जुलाई को एक अधिसूचना जारी कर मूंग को छोड़कर अन्य सभी दालों पर थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिलर और आयातकों पर स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी, जिससे किसान, दलहन व्यापारी, आढ़तिया, मिलर, आयातक,उपभोक्ता सभी बुरी तरह प्रभावित होंगे। ग्रेन, राइस & आयलसीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ( ग्रोमा ) के अध्यक्ष शरद कुमार मारू ने इसका कड़ा विरोध जताया है और कहा कि पूरे देश मे आज भी एमएसपी से कम भाव है। सरकार ने एससेंसियल कॉमोडिटी एक्ट रद्द किया, क्योंकि व्यापारी, मिलर आदि माल जादा खरीद सके, जिससे डिमांड बढ़ जाएगी तथा किसानों के माल का भाव बढ़ जाएगा और उनको जादा फायदा मिलेगा। व्यापारियों का कहना है कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत अच्छा विज़न था कि 2022 तक किसानों के उत्पादन का दुगुना भाव मिले जो अब सम्भव नहीं लग रहा है,। नवी मुम्बई ग्रोमा  के सचिव भीमजी भानुशाली ने कहा कि दलहन की पैदावार को किसानों को तीन महीने में बेचना होता है, जिसमेें 10 प्रतिशत अनाज सरकार किसानों से एमएसपी भाव पर  खरीदती है बाकी 90 प्रतिशत आढ़तिया,मिलर, कारपोरेट, व्यापारी खरीदकर किसानों को सहयोग करते हैं।


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