पुरानी लीक पर उत्तर प्रदेश का विपक्ष

हाल में संपन्‍न हुए ब्लाॅक प्रमुख चुनाव और उसके पहले जिला परिषद में भाजपा की महाविजय ने जहां एक ओर उसके कार्यकर्ताओं के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, वहीं सपा-बसपा और कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष की दुरावस्था को दिन के उजाले की तरह सामने ला दिया है. अभी कुछ दिन पहले तक भाजपा में जिला परिषद चुनाव में अपेक्षित सफलता ना मिलने के कारण जो हलचल शुरू हुई थी अब वह अतीत की बात हो चुकी है. इन उपलब्धियों ने एक बार फिर राज्य में पार्टी की वांछे खिला दी हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं का उत्साह उफान पर है. पांच साल पहले भाजपा के सत्ता में आने के पहले राज्य में गत तीन दशकों से जिस तरह की जातिवादी, अपराधी तत्वों से साठगांठ वाली अल्पसंख्यक परस्त राजनीति का बोलबाला था, उसने इस बार भाजपा का खेल बिगाड़ने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन अंततः बाजी योगी के ही हाथ लगी. इसका मतलब साफ़ है कि भाजपा के नेतृत्व में राज्य में शुरू सबका साथ सबका विकास का कार्यक्रम धरातल स्तर तक पहुंच रहा है. योगी युग में चाहे वह मूलभूत सुविधाओं में सुधार हो, सफेदपोश या जरायम पेशा अपराधियों पर नकेल कसने की बात हो, विकास का फल हर स्तर, हर वर्ग तक पहुंचाने की बात हो, किसान हित, कोरोना से लड़ाई की बात हो, शहरों के कायाकल्प की बात हो, पर्यटन बढ़ाने की बात हो हर स्तर पर अभूतपूर्व काम हो रहा है और होता दिख रहा है. कई हवाई अड्डे जल्द उड़ान भरना शुरू करेंगे. पांच साल बीतने को है विपक्ष किसी भी मुद्दे पर सरकार को घेर नहीं सका है, ना ही उस पर कोई दाग लगा सका है. उल्टा उसके कार्यों से पूर्व के सपा-बसपा सरकारों के काले कारनामे रोज उजागर हो रहे हैं. इस सबका फल है कि राज्य और देश में ही नहीं दुनिया में योगी सरकार की वाहवाही हो रही है, जिसका फायदा पार्टी उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश में उठा रही है. यह अनायास ही नहीं कि देश में हो रहे हर चुनाव में योगी का नाम पार्टी के मुख्य स्टार प्रचारकों की पहली पंक्ति में होता है. इतनी खूबियां उत्तर प्रदेश में कमल की सुगंध को आज से ज्यादा जोर-शोर से भविष्य में बरकरार रखने वाली है इसमें कोई दो राय नहीं है. वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमा है जो हताश, अलग-थलग और अपने ही अंतर्विरोधों से त्रस्त है. कारण उनके अतीत के कामों की तुलना आज भाजपा के कामों से होती है तो उसमें सिर्फ भ्रष्टाचार, जातिवाद, अल्पसंख्यक परस्ती, परिवारवाद और सफेदपोश अपराधियों को बढ़ावा ही दीखता है, जिन्होंने अरबों रुपयों की सरकरी जमीन कब्जाई थी और लोगों का जीना मुहाल किये हुए थे. उनके नाम के आगे विकास के नाम पर यदि कुछ दिखता तो वह सिर्फ शून्य ही दिखता है. बसपा की स्थानीय निकाय में प्रदर्शन अदृश्य सरीखा है. कहीं कुछ दिखता ही नहीं, सपा कुछ दिखती है लेकिन वह भी नगण्य है, कांग्रेस की लौ इतनी मंद गति से टिमटिमा रही है कि उसमें सिर्फ प्रकाश का आभास है कुछ काम बनता नहीं दिख रहा. इसका कारण है कि यह देश में आये बदलाव के अनुसार अपने आपको ढालने में नाकाम हैं, इन्हें  लगता है कि सिर्फ भाजपा को, उसके एजेंडे को निशाना बनाकर यह उसे  पटखनी दे सकते हैं. यह अपनी रीति-नीति, चाल-ढाल, सोच और व्यवहार बदलने को तैयार ही नहीं है. यह फिर अपनी पुरानी रीति-नीति राज्य पर लादना चाहते हैं. यह नहीं जान पा रहे हैं कि राज्य ने अब उससे इतर स्वाद चख लिया है वह आज राज्य काे पिछड़े से अगड़ा देख रहा है. आज अपराधी नंगा नाच नहीं कर रहे हैं पलायन पर हैं उनकी जान की लाले पड़े हैं. प्रदेश में निवेश लाने की बात हो रही है जातियों और धर्मों के लोगों  को आपस में लड़ाने और अपनी राजनीतिक दूकान चमकाने की कुत्सित चाल नहीं खेली जा रही है, बल्कि सबका विकास कैसे सुनिश्चित हो इस दिशा में रात-दिन काम हो रहा है. तो अब इन्हें इससे बेहतर करने का प्रारूप जनता के सामने रखना होगा. पुराने तरीके काल वाह्य हो चुके हैं और यदि ये नहीं बदले तो यह भी उन्हीं तरीकों की तरह काल वाह्य हो जायेंगे और फिर नहीं उठेंगे.


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