आतंकवाद को खत्म करेगी सेना की 'नारी शक्ति'


नई दिल्ली

भारतीय सेना में ऐसा पहली बार हो रहा है जब महिलाओं को युद्ध के लिए सीमा पर खड़ा किया जा रहा है। असम की राइफल्स महिला सैनिकों के ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई है। उन महिलाओं को कश्मीर में पुरूष जवानों के साथ तैनात किया गया है। इनकी तैनाती मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में हुई है, जहां वे आतंकवाद विरोधी अभियानों में पुरूष जवानों का साथ कदम मिलाकर चल रही है।

ये महिला सैनिक महिलाओं और बच्चों की तलाशी के लिए ये मोटर-व्हीकल चेक प्वॉइंट्स पर तैनात हैं। साथ ही वो कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन के दौरान घर-घर की तलाशी में भी मदद कर रही हैं। महिला सुरक्षाकर्मी ज्योत्सना का कहना है कि हम अभियान के दौरान ध्यान रखते हैं कि इससे महिलाओं को समस्या से जूझना ना पड़े। तलाशी के बाद हम उन्हें सुरक्षित स्थान पर लेकर जाते भी हैं। हमें उम्मीद है कि कश्मीर की लड़कियां भी प्रेरित होंगी और देश की सेवा के लिए सेना में आऐंगी। वहीं महिला सुरक्षाकर्मी रुमान रूपाली ने बताया कि हम पुरुषों की तरह ड्यूटी करते हैं। हम घेराबंदी और तलाशी अभियान में जाते हैं। हम डरने वालों में से नहीं हैं और चुनौतियों से खूब लड़ना जानते हैं। हम स्थानीय महिलाओं की सेवा करने के लिए यहां मौजूद हैं। इससे पहले इन सभी महिला जवानों को कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था। इन्हें नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहां के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि महिला जवानों के आने से तस्करी को रोकने में मदद मिल रही है। 


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