मरीजों के शरीर में ही आकार ले रहे नए वैरिएंट्स


हैदराबाद

कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी भी मंडरा रहा है, वहीं एक के बाद एक सामने आने वाले वैरिएंट्स ने मुसीबतें बढ़ा दी है। इसी बीच हैदराबाद में सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी सहित कई शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स के पीछे के रहस्य को समझने का दावा किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वैरिएंट संक्रमित शख्स के शरीर में ही बढ़ते हैं और आकार लेते हैं। एक शोध में वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोना वायरस एक संक्रमित व्यक्ति के शरीर में परिवर्तन से गुजरता है और एक बार यह हो जाने के बाद, यह अपने साथ परिवर्तन करने वाले नए लोगों को संक्रमित करता है। इसके जरिए ही नए वैरिएंट्स बनते हैं। टीम ने पाया कि व्यक्तियों में लगभग 80 प्रतिशत जीनोम बाद में नए वैरिएंट्स के रूप में सामने आए।

वैज्ञानिकों का कहना है कि समय के साथ व्यक्तियों और आबादी में वायरस के बदलने के क्रम पर नजर रखने से उनको महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं जो कि अनुकूल या हानिकारक हैं। यह जानकारी जनसंख्या में वायरस स्ट्रेन के प्रसार और संक्रामकता की भविष्यवाणी करने के लिए बहुत 

उपयोगी होगी। शोधकर्ताओं ने महामारी के दो अलग-अलग समय के कोरोना मरीजों के सैंपल का विश्लेषण किया। पहले चरण में, टीम ने चीन, जर्मनी, मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और भारत से जून 2020 तक सैंपल इकठ्ठा किए गए 1,347 नमूनों का विश्लेषण किया। टीम ने वायरल जीनोम में फैले 18,146 आईएसएनवी साइटों का भी अध्ययन किया, जिसमें वायरस के बी.1 और बी.6 के अवशेष शामिल हैं, जो जून 2020 से पहल प्रमुख थे।


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