प्रकृति का प्रकोप

कुछ राज्यों को तरसा रहा मानसून कुछ राज्यों में कहर बरपा रहा है। पहाड़ों में बादल फट रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बिजली और बिहार में पहले से ही बाढ़ से अनेक इलाके तबाह हो रहे हैं। सबसे दुखद आकाशीय बिजली का कहर है। देश भर में अलग-अलग राज्यों में अनेक लोग आकाशीय बिजली से अपनी जान गंवा चुके हैं। राजस्थान में 11 जुलाई तक 23 लोगों की आकाशीय बिजली से मौत हो चुकी है। वहीं इससे घायल होने वालों की संख्या 25 है। राजस्थान के जयपुर, झालावाड़ और धौलपुर जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में सात बच्चों सहित कई लोगों की मौत हुई है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर, कौशांबी और फिरोजाबाद में भी बिजली गिरने से मौतें हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी बिजली गिरने से सात लोगों की जान चली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा में मारे  गए लोगों के परिजनों के लिए ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष’ से दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए मुआवजे की घोषणा की है। उधर, धर्मशाला के भागसू नाग में बादल फटने से भारी तबाही मची है। कई घरों और होटलों को नुकसान पहुंचा है। कई पर्यटकों और स्थानीय लोगों की गाड़ियां भी पानी के तेज बहाव में बह गई हैं। 

बहरहाल, मानसून ने हर तरह से लोगों को चेता दिया है। बादल का फटना और आकाशीय बिजली का गिरना वैसे तो प्राकृतिक घटना है, लेकिन क्या हम इससे होने वाले नुकसान को कम करने के पूरे प्रयास कर सकते हैं? मानसून के मौसम में पर्यटन का अपना आनंद है, लेकिन आम तौर पर इस मौसम में अपने घर ही रहने का चलन ज्यादा रहा है। खराब मौसम के समय पर्यटन स्थलों पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। राजस्थान के आमेर में जो आकाशीय बिजली गिरी है और उससे जो नुकसान हुआ है, उससे बचा जा सकता था। आगे के लिए सबक लेना जरूरी है। ऐसे मौसम में चिंता वाजिब है। इन दिनों धर्मशाला में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है और इस बीच हादसों ने चिंता को बहुत बढ़ा दिया है। बीते दिनों ऐसी कई तस्वीरें आई थीं, जिनमें धर्मशाला, शिमला, मनाली और उत्तराखंड के मसूरी समेत कई पर्यटन स्थलों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। जहां राज्य सरकारों को भीड़ का यथोचित प्रबंधन करना चाहिए, वहीं लोगों को भी इस मौसम में अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए। 

आकाशीय बिजली के  गिरने, बादल फटने और बाढ़ का क्या हम प्रबंधन कर सकते हैं? क्या इनकी वजहों से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं? हर बार जलवायु परिवर्तन की चर्चा होती है, लेकिन क्या जमीनी स्तर पर इस खतरे को समझने और संभालने के नियोजित प्रयास हो रहे हैं? क्या लोग दूरगामी खतरों या तात्कालिक खतरों को ठीक से समझ पा रहे हैं? भेड़चाल और प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा अनियंत्रित दोहन हमारे लिए समस्याएं बढ़ाता जा रहा है। आगामी मौसम संबंधी भविष्यवाणियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। जहां-जहां भारी बारिश के अनुमान हैं, वहां विशेष रूप से आपदा प्रबंधन के पूरे इंतजाम करने पड़ेंगे। उन इलाकों में मौजूद पर्यटन और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। आम लोगों तक विशेषज्ञ सलाह पहुंचाना भी समय की मांग है।

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