अब मिलेगी सस्ती बिजली!


नई दिल्ली

उपभोक्ता बहुत जल्द मोबाइल कंपनी की तरह बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनी चुन सकेंगे। इसके लिए सरकार बिजली कानून में संशोधन करने संबंधी बहुप्रतीक्षित विधेयक मानसून सत्र में लाएगी। मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इसमें एक क्षेत्र में कई कंपनियों को आपूर्ति करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं के पास अपनी पसंद की कंपनी चुनने का विकल्प होगा। यह कानून विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति के साथ ही दूसरी सुविधाएं देने का भी रास्ता साफ करेगा। यह विधेयक बिजली क्षेत्र में क्रास सब्सिडी को खत्म करने और बिजली वितरण में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने कहा कि इसमें कंपनियों पर अक्षय ऊर्जा खरीद की शर्त (आरपीओ) कड़ाई से लागू की जाएगी। इसके अलावा विधेयक में क्रॉस सब्सिडी यानी एक वर्ग से ऊंचा मूल्य लेकर दूसरे वर्ग के उपभोक्ता को सस्ती दर पर बिजली देने के मामले में दर का अंतर 20 फीसदी से कम रखने की शुल्क नीति अनिवार्य की जाएगी। इसका मतलब है कि उच्च और न्यूनतम शुल्क दरों  में 20 प्रतिशत से अधिक अंतर नहीं होगा जो अभी काफी ज्यादा है। मंत्री ने कहा कि इससे उद्योग को मिलने वाली बिजली की दरें उचित होंगी जो फिलहाल काफी ऊंची होती हैं।

मौजूदा समय में बिजली एक्सेंज पर बिजली की दर तीन रुपए प्रति यूनिट से कम है, जबकि कंपनियां उपभोक्ताओं से पांच से छह रुपए प्रति यूनिट की दर से वसूल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने और लंबी अवधि के करार की वजह से मौजूदा बिजली कंपनियां दाम घटाने को तैयार नहीं है। नई कंपनियां मौजूदा बाजार भाव पर बिजली खरीदेंगी जिससे वह सस्ती पेशकश कर सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा।


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