मानव तस्करी के खिलाफ केंद्र ने बढ़ाया कदम

नए विधेयक में 10 साल तक की सजा का प्रावधान


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मानव तस्करों पर नकेल कसने और पीड़ितों के लिए पुनर्वास जैसे कदम उठाने का फैसला किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मानव की तस्करी (निवारण, देखभाल और पुनर्वास) विधेयक, 2021 का मसौदा सार्वजनिक किया है। साथ ही साथ इस पर मंत्रालय ने 14 जुलाई तक फीडबैक मांगा है। बिल को अंतिम रूप देने के बाद कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी और संसद के दोनों सदनों से सहमति की आवश्यकता होगी। इस विधेयक में मानव तस्करी में लिप्त लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। नया विधेयक मानव तस्करी विधेयक 2018 के बाद संशोधन की एक लंबी प्रक्रिया के बाद आया है। 

मानव तस्करी विधेयक 2018 को लोकसभा में तीखी बहस के बाद मंजूरी मिली थी, लेकिन राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया था और 2019 में मोदी सरकार का पहला कार्यकाल खत्म हो गया, जिसके बिल भी समाप्त हो गया. अब इस बहुप्रतीक्षित नए मसौदा विधेयक में प्रस्ताव है कि “व्यक्तियों की तस्करी” का अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम सात साल की कैद की सजा दी जाएगी, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

 बिल में “तस्करी के गंभीर रूपों” को लेकर वर्गीकृत अपराधों के लिए अधिक कठोर दंड की सूची भी तैयार की गई है. इस विधेयक में संगठित अपराध सिंडिकेटों, संगठित आपराधिक समूहों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें सीमा पार से जुड़े अपराध भी शामिल हैं.

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