चीन को भारत ने सुनाई खरी-खरी

LAC पर यथास्थिति का एकतरफा परिवर्तन स्वीकार्य नहीं?: जयशंकर


दुशांबे

लद्दाख में पिछले एक साल से जारी तनातनी के बीच भारत और चीन के विदेश मंत्रियों ने तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों के विदेश मंत्री अफगानिस्तान को लेकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की विदेश मंत्री स्तर की बैठक में शामिल होने के लिए दुशांबे पहुंचे हैं। भारत की तरफ से शामिल हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के सात लद्दाख में जारी तनाव पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि यह बैठक एक घंटे तक चली, जिसमें भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की जल्द बैठक बुलाने पर सहमति बनी।

एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि यह चर्चा लद्दाख के पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ बकाया मुद्दों पर केंद्रित थी। उन्होंने वांग यी से कहा कि एलएसी पर यथास्थिति का एकतरफा परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे संबंधों के विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, शांति की पूर्ण बहाली और उसे बनाए रखना अतिआवश्यक है।

लद्दाख में अभी कैसे हैं हालात

भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर असहज शांति बनी हुई है। सीमा से सैनिकों को हटाने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। इसके बाद भी भारत-चीन सीमा पर कई ऐसे पॉइंट्स मौजूद हैं, जहां जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने डटी हुई हैं। उधर, लद्दाख के इस अशांत इलाके में जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे चीनी सेना अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

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