जम्मू IAF स्टेशन हमले के लिए IED में RDX और नाइट्रेट का इस्तेमाल

'यह अकेले जैश या लश्कर का काम नहीं'


श्रीनगर

जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डा परिसर स्थित वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन हमले में इस्तेमाल आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज) को आरडीएक्स और नाइट्रेट के मिश्रण से तैयार किया गया था। ड्रोन हमले की जांच में जुटे फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सोमवार को यह जानकारी दी। जांच अधिकारियों ने पहले ही बताया था कि ड्रोन द्वारा गिरायी गई विस्फोटक सामग्री आरडीएक्स और अन्य रसायनों के मिश्रण का उपयोग कर बनायी गई हो सकती है। जांच में शामिल अधिकारियों ने बताया कि पहला आईईडी जो देर रात 1:37 बजे ब्लास्ट हुआ, उसमें 1.5 किलोग्राम आरडीएक्स और एक नाइट्रेट यौगिक का मिश्रण था, जबकि दूसरे आईईडी में अधिक संख्या में बॉल बेयरिंग थे। एक अधिकारी ने कहा, 'ऐसा लगता है कि पहला आईईडी स्टेशन के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया था, जबकि दूसरे आईईडी का मकसद जवानों की जान लेना था। सूत्रों के अनुसार, आईईडी काफी जटिल एवं बेजोड़ हैं और ऐसा लगता है कि इन्हें एक आयुध कारखाने में तैयार किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि योजना यह थी कि पहला आईईडी हेलीकॉप्टरों को नुकसान पहुंचाएगा। जबकि दूसरा वायुसेना कर्मियों के इकट्ठा होने के बाद उन्हें अपंग कर देगा और मार देगा। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का के आईईडी बनाना अकेले लश्कर या जैश जैसे तंज़ीम का काम नहीं हो सकता। एनआईए को संदेह है कि पाकिस्तानी आईएसआई और रेंजर्स ने लश्कर ए तैयबा को एक मोर्चे के रूप में इस्तेमाल करके विस्फोट को अंजाम दिया होगा। हालांकि, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इस बात का अभी तक कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। 


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