बाढ़ प्रभावितों के लिए 11 हजार 500 करोड़ का पैकेज

कैबिनेट बैठक में मंजूर हुआ राहत प्रस्ताव  ।  सामान्य की अपेक्षा अधिक दर से मदद का फैसला


मुंबई 

कोकण के रायगड, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सातारा जिलों में आई भीषण बाढ़ के प्रभावितों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने 11 हजार 500 करोड़ रुपए का पैकेज घोषित किया है। राहत पैकेज को मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किया गया।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से महाराष्ट्र अलग-अलग प्राकृतिक आपदा और कोविड के संकट का सामना कर रहा है। ऐसे हालत में सरकार ने प्रभावितों को अधर में न छोड़ते हुए उनकी मदद की है। 

ठाकरे ने कहा कि बाढ़ प्रभावितों के लिए सरकार ने 11 हजार 500 करोड़ रुपए के प्रावधानों को मंजूरी देकर उनके आंसू पोछने का प्रयास किया है। नुकसान बहुत बड़ा है। किसान, व्यापारी, दुकानदार, आम नागरिक, कारीगर सभी पीड़ित हैं, ऐसे में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सामान्य से अधिक दर पर मदद करने का निर्णय लिया  गया है।

दुकानदारों को 50 हजार

एनडीआरएफ के मापदंड से आगे जाकर सानुग्रह अनुदान के रूप में हर परिवार को 10 हजार की मदद की जाएगी। दुकानदारों को 50 हजार और टपरी धारकों को 10 हजार की मदद की जाएगी। घर पूरी तरह ध्वस्त हो जाने पर डेढ़ लाख, 50 फीसदी नुकसान होने पर 50 हजार और 25 फीसदी नुकसान या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए कम से कम 15 हजार रुपए दिए जाएंगे। परिवार के कपड़े, घरेलू बर्तन और अन्य वस्तुओं के नुकसान पर 5 हजार रुपए दिए जाएंगे। मछली पकड़ने वाली नौका के नुकसान पर मुआवजा मिलेगा। 

बाढ़, भूस्खलन के स्थायी समाधान की पहल  

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रशासन को बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महाड, चिपलून में बाढ़ की स्थिति के नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार वशिष्टी, गांधारी, सावित्री नदियों के द्वीप और गाद को हटाकर मॉडल अध्ययन के आधार पर 3 साल में बाढ़ सुरक्षा दीवार को पूरा किया जाना चाहिए।  कोकण की बांध निर्माण परियोजनाओं को तीन साल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोयना टेलरेस पानी मुंबई लिंक परियोजना के लिए डीपीआर अध्ययन कर 3 माह में निर्णय लेने और भूस्खलन की घटनाओं को रोकने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों एवं प्रशासकों की समिति गठित कर 3 माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। साथ ही कोकण में 26 घाटियों में बाढ़ चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।


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