स्कूली फीस में 15 फीसदी कटौती

सरकारी आदेश जारी, अभिभावकों को राहत

school

मुंबई

स्कूली फीस में 15 फीसदी कटौती करने का फैसला 28 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था। गुरुवार को इस संबंध में सरकार ने शासनादेश (जीआर) जारी किया गया। जीआर में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में निर्धारित कुल फीस में 15 फीसदी कटौती की बात कही गई है, लेकिन जिन अभिभावकों ने पूरी फीस भरी है, उन्हें स्कूल प्रबंधन की तरफ से मान्य 15 फीसदी कटौती अगले माह, तिमाही किश्त या अगले साल की फीस में समायोजित की जाएगी।

फीस कटौती को लेकर स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच विवाद की स्थिति में अभिभावक संबंधित विभागीय शुल्क नियामक समिति या विभागीय शिकायत निवारण समिति के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस पर अंतिम निर्णय विभागीय शुल्य नियामक समिति या विभागीय शिकायत निवारण समिति का होगा।

जीआर में कहा गया है कि महामारी के दौरान एकाध छात्र ने फीस नहीं भरी या बाकी फीस का भुगतान नहीं किया तो स्कूल प्रबंधन को ऐसे किसी भी छात्र की प्रत्यक्ष या ऑनलाइन शिक्षा को बंद नहीं करना चाहिए। साथ ही इन छात्रों को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाना चाहिए या ऐसे छात्र का परिणाम रोका नहीं जाना चाहिए। कोरोना संकट की वजह से स्कूल बंद हो गए थे और बच्चे घर पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। कोरोना की वजह से अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल होने पर स्‍कूलों की पूरी फीस को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद राजस्थान के एक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने 15 फीसदी फीस कटौती का आदेश दिया था। इसी फैसले के आलोक में कैबिनेट बैठक में स्कूल फीस में 15 फीसदी की कटौती करने का निर्णय लिया गया था। पहले इस संबंध में एक अध्यादेश निकालने की बात कही जा रही थी, लेकिन कानूनी विवाद होने की आशंका के चलते अंतत: शासनादेश जारी किया गया।


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