मीठी नदी की गंदगी रोकने के लिए खर्च होंगे 500 करोड़


मुंबई

मीठी नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए मनपा ने विभिन्न उपाय करते हुए सीवरेज बहाव को रोकने का फैसला किया है। कुर्ला में नदी में मिलकर बहने वाले दो नालों से सीवरेज को 6 किमी भूमिगत सुरंग के माध्यम से धारावी के प्रसंस्करण केंद्र में लाया जाएगा। स्थायी समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव ने बताया कि 500 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है।

मीठी नदी के पानी की सफाई, तटों पर तथा आवश्यक स्थानों पर सुरक्षा दीवार का निर्माण, सौंदर्यीकरण, साइकिल ट्रैक जैसी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं लागू की जा रही हैं. मीठी नदी के उपचार के लिए कुछ स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। कुर्ला में सफेद पुल और बापट नाला सीधे मीठी नदी में मिलते हैं. इसलिए सीवरेज को मीठी नदी में बहने से रोकने के लिए 6.7 किमी लंबी सुरंग का निर्माण किया जाएगा। भविष्य की जरूरतों के अनुसार वर्ष 2051 तक प्रतिदिन अनुमानित 168 मिलियन लीटर सीवरेज को ध्यान में रखते हुए सुरंग का निर्माण किया जाएगा। 

2.6 मीटर व्यास और 6.5 किमी लंबी सुरंग के निर्माण पर कुल 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही, अन्य करों सहित, कुल लागत 604 करोड़ रुपये तक जाएगी।

एक समय ब्लैक लिस्टेड था ठेकेदार

सड़क मरम्मत घोटाले में फंसे जे. कुमार कंपनी को मनपा ने वर्ष 2016 में सात साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। जे. कुमार की कंपनी ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी। 

कोर्ट ने  मनपा  प्रशासन को मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत मनपा ने जे. कुमार बी ब्लैकलिस्ट अवधि को तीन साल कर दिया. हालांकि कंपनी के उपर लगी जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है। जे. कुमार की ब्लैकलिस्ट की अवधि 2019 में समाप्त हो गई। मनपा  प्रशासन ने बताया कि अब कंपनी मनपा  की निविदा प्रक्रिया में कानूनी रूप से पात्र है। यह प्रस्ताव सभी पक्षों के समर्थन से मंजूर कर लिया गया।

मैंग्रोव के नीचे से जाएगी सुरंग

कुर्ला से धारावी तक बनने वाली यह सुरंग मैंग्रोव्ज के नीचे से जाएगी। इसलिए मनपा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरंग बनने पर पर्यावरण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संबंधित ठेकेदार को इस कार्य के लिए पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सुरंग की लंबाई-6.7 किमी, सुरंग का व्यास-2.6 वर्ग मीटर, शाफ्ट का आंतरिक व्यास-10 वर्ग मीटर होगा। वर्क ऑर्डर मिलने के बाद काम को 48 माह में पूरा करना होगा। 


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