कोहली ने बदले टीम इंडिया के तेवर

virat kohli

लंदन

लॉर्ड्स में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद चारों ओर कप्तान विराट कोहली की चर्चा हो रही है। हो भी क्यों ना, उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नए आयाम तक जो पहुंचाया है। किसने सोचा था कभी कि 8 महीने के भीतर गाबा, लॉर्ड्स जैसे SENA देशों (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) के मैदानों पर भारत जीत दर्ज करेगा। यह कोहली का नेतृत्व और खिलाड़ियों की मेहनत ही है, जिसने ये संभव कर दिखाया।

भले ही अब तक विराट ने भारत को अब तक कोई ICC ट्रॉफी नहीं जिताई हो, लेकिन विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम जरूर तैयार की है, जिसके मुख्य खिलाड़ी तो विपक्षी टीम पर भारी पड़ते ही हैं, उनकी गैरमौजूदगी में युवा खिलाड़ी सिडनी व गाबा जैसा खेल दिखाते हैं, जिसकी चर्चा सालों साल क्रिकेट गलियारों में होती रहेगी।

साल 2014 में महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के बाद विराट को टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया था और अपनी पहली ही सीरीज में ही उन्होंने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया था कि जिस तरह से वह नेतृत्व कर रहे हैं उससे एक छाप छोड़ना चाहते हैं। टेस्ट क्रिकेट में एक बल्लेबाज के तौर पर कोहली की फॉर्म 2020 की शुरुआत से ही काफी खराब देखने को मिली, लेकिन उन्होंने इसका असर बतौर कप्तान टीम के ऊपर नहीं पड़ने दिया। टेस्ट क्रिकेट खेलने और उसमें उत्कृष्टता हासिल करने का जुनून कोहली को सबसे अलग बनाता है।

एक समय हुआ करता था जब विदेशी सरजमीं पर भारत कभी चार तेज गेंदबाज नहीं खिलाता था, लेकिन कोहली ने न सिर्फ टीम की इस सोच को बदला, बल्कि तेज गेंदबाजी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर दिखाया। तेज गेंदबाजी में उन्होंने मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा, उमेश यादव, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों के बेहतरीन दल का निर्माण किया।

इन गेंदबाजों के साथ-साथ टीम के पास बैक-अप तेज गेंदबाजों के रूप में शार्दूल ठाकुर, नवदीप सैनी, भुवनेश्वर कुमार, टी नटराजन और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे गेंदबाज भी तैयार हैं।

मैदान पर भारतीय कप्तान को हमेशा पूरे जोश और आक्रामक अंदाज में देखा जाता है। लॉर्ड्स टेस्ट को ही ले लीजिए, चौथे और पांचवें दिन के खेल में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी को इंग्लैंड की टीम ने लगातार स्लेज कर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन कोहली ने अपने खिलाड़ियों का पूरा साथ दिया और लॉर्ड्स की बालकनी से खिलाड़ियों में जोश भरते हुए नजर आए।

अंतिम दिन के खेल में उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले जेम्स एंडरसन, जोस बटलर और ओली रॉबिंसन को भी करारा जवाब देने को कोई मौका नहीं छोड़ा।

लॉर्ड्स टेस्ट में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवार्ड जीतने वाले ओपनर लोकेश राहुल ने भी अपने बयान में कहा था- अगर विपक्षी टीम का एक खिलाड़ी हमारे खिलाड़ी को छेड़ेगा, तो हमारे 11 खिलाड़ी छोड़ेगे नहीं।'

राहुल का यह बयान साफ दर्शाता है कि भारतीय टीम किस जोश और उत्साह के साथ टेस्ट क्रिकेट खेल रही है। मौजूदा टीम का हर एक खिलाड़ी सामने वाली टीम की आंखों में आंखें डालकर जवाब देने की हिम्मत रखता है और बैखोफ होकर खेलता है। बहुत हद तक इसका श्रेय भी कप्तान कोहली को ही जाता है।

विराट कोहली का रिकॉर्ड बतौर कप्तान अब विदेशी सरजमीं पर भी लगातार बेहतर होता जा रहा है। खासतौर से एशिया के बाहर तो कोहली नए इतिहास लिख रहे हैं। एशिया के बाहर विराट ने 26 टेस्ट मैचों की कप्तानी की है और इस दौरान भारत 9 में जीत दर्ज करने में सफल रहा है। 12 मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा, जबकि 5 मुकाबले ड्रॉ पर समाप्त हुए। वहीं, बात अगर महेंद्र सिंह धोनी की करें तो उन्होंने 26 टेस्ट मैचों में सिर्फ 4 में जीत हासिल की थीं और 14 में टीम का हार का मुंह देखना पड़ा था, 8 मुकाबले ड्रॉ रहे थे।


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