जनसेवा की नइ धमक सुनील राणे


सामाजिक सरोकारों के प्रति सदैव सजग एवं तत्पर रहने वाले बोरीवली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सुनील दत्तात्रय राणे ने अपने दो साल के कार्यकाल में जनता की मूलभूत जरूरतों और सुविधाओं पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का ऐसा खाका तैयार किया कि स्थानीय अवाम उन्हें अपना सच्चा जनसेवक मानने लगी, तो विरोधी भी उनकी कार्यप्रणाली के कायल हो गए...। वैश्विक महामारी कोरोना काल में जन-जन तक पहुंचकर उनकी तरह-तरह की छोटी-बड़ी समस्याओं को कमोवेश सुलझाने  के अलावा बोरीवली को एक विशेष पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत सुनील राणे की जीवटता के संदर्भ में पेश है उनसे ही सवाल-जवाब के प्रमुख अंश- 

कोरोना काल के दौरान किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

बोरीवली विधानसभा क्षेत्र से मैं पहली बार विधायक बना। थोड़ा ही समय बीता था कि वैश्विक महामारी कोरोना का दौर शुरू हो गया। पिछले 15-16 महीने से जनप्रतिनिधि के तौर पर मैं अपने क्षेत्र की जनता तक पहुंच कर उनकी समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास कर रहा हूं। इस दौर में सबसे पहले लोगों तक अनाज पहुंचाने का काम शुरू किया। फिर बारी आई दवा की। इसके बाद अस्पतालों और वहां बनने वाले भारी भरकम बिल को कम कराने की चुनौती खड़ी हुई। कोरोना काल में बहुत सारे लोगों की नौकरी गई और बेरोजगार हुए। बेरोजगारों की मदद, स्कूल खुलने पर अॉनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल और लैपटॉप उपलब्ध कराने... फीस भरने... और अंत में दौर शुरू हुआ वैक्सीन का। केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई वैक्सीन के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ी। गोराई और मनोरी में दो हजार वैक्सीन लगवाने में हम सफल हुए हैं। वैक्सीन लगवाने का यह सिलसिला अभी लंबा चलेगा। क्योंकि कोरोना अभी जिंदा है...।   

महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार हमारी प्राथमिकता है। अस्पतालों में सुविधाएं, नर्सेस, डायलिसिस का काम और तेज करना होगा।  

आपकी पहचान कार्यसम्राट विधायक के रूप में बन रही है। कैसा लगता है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस और अन्य वरिष्ठ जनों का बहुत-बहुत धन्यवाद। इन लोगों ने मौका नहीं दिया होता तो मैं विधायक नहीं बन पाता। वर्ली से दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुका हूं। बाद में वरिष्ठजनों ने बोरीवली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया। बोरीवली की जमीन को हेमेंद्र भाई, रामभाऊ नाईक और बाद में विनोद तावड़े ने सींचा था। मेरे लिए सबकुछ नया था। मुंबई भाजपा में लगभग 17 साल तक महामंत्री पद पर कार्य करने के नाते कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ताओं की पहचान थी। मैंने आगे बढ़ने का एक मॉडल तैयार किया। पिता जी विधायक थे... मंत्री थे। हार-जीत का सिलसिला बचपन से ही देखते चला आ रहा हूं। छोटा था तब भी लोगों के बीच जाकर काम करने की जिज्ञासा थी। पहले स्टूल पर खड़े होकर भाषण देता था... मंच से भाषण देने का मौका मिला। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मंुडे का दौर था, इस दौर में बहुत कुछ सीखने का मौका मिला था। समाजसेवा और सियासत मेरी नस-नस में थी। 

बोरीवली से विधायक बना तो कोरोना आ गया। इससे निपटने का मूलमंत्र किसी के पास नहीं था। लेकिन आत्मविश्वास के साथ मैं आगे बढ़ा। जन-जन से मेल मिलाप शुरू किया। लोगों में विश्वास जगा... तो मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा। पुलिस के साथ गश्त पर निकला... पैदल ही जागरुकता अभियान चलाया। इस दौरान बोरीवली और यहां की राष्ट्र प्रेम से लबरेज जनता को नजदीक से जानने का मौका मिला। उनकी समस्याओं को समझा। समुद्र पार के गांवों, मछुआरों की समस्याओं को सुलझाने का संकल्प लिया और धीरे-धीरे काफी हद तक सफल भी रहा। 

हमारे क्षेत्र में 800- 850 एकड़ पर म्हाडा है। म्हाडा से जुड़ी हर चीज को मैं बहुत बारीकी से समझता हूं। पुरानी एवं जर्जर इमारतों, झोपड़पट्टियों के पुनर्वसन को लेकर पिछले 20 साल से प्रमुखता से काम कर रहा हूं। इस बारे में मुझे अधिक जानकारी इसलिए है, क्योंकि वर्ली बीडीडी चाल को लेकर आंदोलन चलाया था। जब विधायक बना तो यहां पर म्हाडा से जुड़े कामों को गति दी। बोरीवली भाजपा के सांसद गोपाल शेट्टी का क्षेत्र है। पांच नगरसेवक हैं। इस पार्टी के पदाधिकारी हैं। जुझारू कार्यकर्ता हैं। इनके अलावा अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को अपने साथ जोड़ा। सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपने साथ लिया। यहीं से पांच मिनट की दूरी पर बने अथर्व कॉलेज के लिए मैंने 20 साल दिया। कॉलेज के छात्रों ने हमारा भरपूर साथ दिया। पार्टी नेताओं के सहयोग, कर्मठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का साथ और किसी भी मंजिल को हासिल करने का जुनून रखने वाले छात्रों के समर्पण भाव के चलते हर गली में सुनील राणे दिखायी देने लगा। मैं अकेला चला था और कारवां बनता गया...। 

राज्य में भाजपा की सरकार नहीं है, लेकिन मैं अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो केंद्रीय योजनाएं संचालित हो रही हैं उन्हें मैं अपने क्षेत्र की जनता से जोड़ने का काम कर रहा हूं। इन योजनाओं के तहत जो कुछ भी मिल रहा है उन्हें अवाम तक पहुंचाना मेरा कर्तव्य है। विशेषकर स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का अधिकाधिक फायदा अपने क्षेत्र की जनता को दिला रहा हूं इसका मुझे संतोष है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत मैंने अपने क्षेत्र में लड़कियों को साइकिल वितरित की। उनके शिक्षा को लेकर हर तरह की मदद देने का काम किया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में आवास बनाने का अभियान चलाया है। मछुआरों के लिए काम करना शुरू किया तो लोगों ने भरपूर साथ दिया। केंद्रीय योजनाओं और लोगों के सहयोग के बल पर हम आदिवासी और मछुआरों के क्षेत्रों में हर वह काम करना चाहते हैं जो आमजन की जरूरत है।     

बोरीवली को क्या देना चाहते हैं? 

यहां आकर पहले घर बनाना पड़ा। अथर्व कॉलेज से भरपूर मदद मिली। पूरा परिवार मेरे साथ रहने आ गया। मेरे पिता जी भी मेरे साथ यहीं आ गए। कोरोना काल से पहले माता जी का निधन हो गया। बोरीवली देशभक्त नागरिकों का शहर है। यहां हर भाषा के लोग रहते हैं। रामभाऊ नाईक ने मनोरी में समुद्र के नीचे से पानी लाया। आदिवासी क्षेत्रों में पानी की काफी समस्या है जिसे मुझे पूरी तरह से समाप्त करना है। मुझे विश्वास है, मैं अपने लक्ष्य को हासिल करूंगा। बोरीवली में रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में काफी काम करना है। मैंने खाका तैयार कर लिया है। आने वाले समय में यह क्षेत्र रोजगार उपलब्ध कराने में अग्रणी होगा। पश्चिम रेलवे के एेतिहासिक रेलवे स्टेशन चर्चगेट के बाद बोरीवली स्टेशन पर ही लोगों की भीड़ नजर आती है। यहां पर एक मल्टीसुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाए जाने की जरूरत है। खादी ग्रामोद्योग की जमीन पहले से ही है। पर्यटन के क्षेत्र में बोरीवली बहुत विकसित हो सकता है। यहां का समुद्री किनारा गोवा जैसा बन सकता है। इन सब क्षेत्रों में काम हो तो रोजगार के अवसर पैदा होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में काम हो जाए तो सदियां याद करेंगी। यह सब कुछ असंभव नहीं... संभव है। दो साल में जितना काम किया गया है आने वाले तीन सालों में बहुत कुछ किया जा सकेगा। जनता ने साथ और सहयोग बनाए रखा तो हमने जो खाका तैयार किया है उसे मूर्तरूप देने में कोई रुकावट नहीं आ सकती।   

मुंबई मनपा चुनाव को लेकर क्या रणनीति है?   

मुंबई मनपा में भाजपा की सत्ता लाने का पूरा प्रयास करेंगे, यह एक बात है। सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस (महाविकास आघाड़ी) की सरकार आने के बाद मुंबई मनपा से जुड़े सवालों के ढ़ेर लगे हैं। तरह-तरह के वादे किए गए थे लेकिन सारे वादे पानी के बुलबुले की तरह फूटकर गायब हो गए। दावा किया गया था प्रॉपर्टी टैक्स माफ किया जाएगा, लेकिन केवल एक टैक्स माफ करने का दिखावा किया गया। जनता नाराज है। नाराज जनता क्या करती है यह बताने की जरूरत नहीं है। कोरोना काल के आखिरी दौर में केंद्र सरकार की तरफ से जो वैक्सीन उपलब्ध करायी गई उसमें कोई नियोजन नहीं होने के चलते लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। राज्य सरकार और मुंबई मनपा में सामंजस्य न होने का खामियाजा जनता ने ही भुगता है। मुंबई मनपा का बजट 36 हजार करोड़ रुपए का है। लेकिन शहर की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था लचर है। मनपा द्वारा संचालित केईएम, सायन, नायर, शताब्दी जैसे बड़े अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। स्वास्थ्य के तीन हजार करोड़ के बजट का क्या हो रहा है इस सवाल का जवाब जनता जरूर चाहेगी। मनपा का शिक्षा बजट 2800 करोड़ रुपए का है।  यह बजट कौन सी शिक्षा नीति पर खर्च हो रहा है? मनपा ने कितने स्कूल बनाए हैं? कुछ नई इमारतें बनाई गई हैं जो वैसे ही पड़ी हैं, यहां पर शिक्षा के नाम पर ABCD भी नहीं है। मीठी नदी और शहर के नाला सफाई पर करोड़ों बहाए जाते हैं। रास्ता मरम्मत का मामला जस का तस है। हर तरफ सवाल ही सवाल हैं। झोपड़पट्टी पुनर्वसन का क्या हुआ? झोपड़धारकों के झोपड़े तोड़े गए, लेकिन उन्हें भाड़ा नहीं मिला है। अनगिनत एसआरए प्रकल्प अधर में लटके पड़े हैं। मनपा में सवाल उठाए जाते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। मजेदार बात तो यह है कि शिवसेना के साथ सरकार चला रही कांग्रेस और राकांपा भी इन मुद्दों पर सवाल करती है, लेकिन शिवसेना है कि जवाब देना ही नहीं चाहती। मनपा चुनाव में मुंबईकर इन सवालों का जवाब जरूर जानना चाहेगा। 

भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा का मकसद?  

जन आशीर्वाद यात्रा केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से दिया गया है। सोशल इंजीनियरिंग का काम पहली बार हुआ। अलग-अलग समाज से जुड़े नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जुड़ने का मौका मिला। इन नेताओं को लेकर एक नया समीकरण बनाया गया। 

जनता का आशीर्वाद लेने के लिए यात्रा शुरू की गई। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को नेतृत्व का जिम्मा दिया गया। 

मुझे मुंबई में जिम्मेदारी सौंपी गई। जिस काम से लोग दूर भागते हैं उसे मुझे सौंपा जाता है। जन आशीर्वाद यात्रा में भीड़ जुटाने की बात मायने नहीं रखती, क्योंकि नारायण राणे खुद बड़े कद के नेता हैं और पार्टी कार्यकर्ता केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं। 

बात नियोजन की थी जिसका जिम्मा मैंने संभाला। इस यात्रा का परिणाम मुंबई मनपा चुनाव में जरूर परिलक्षित होगा। 


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