आरबीआई ने हितधारकों से मांगे सुझाव


नई दिल्‍ली

प्राइमरी (शहरी) सहकारी बैंकों को लेकर आरबीआई द्वारा बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी दी है। आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर इस बारे में जानकारी देते हुए आम नागरिकों और हितधारकों से सुझाव भी मांगे गए है। रिपोर्ट पर आम नागरिक और हितधारक अपने जवाब 30 सितंबर 2021 तक जमा कर सकते हैं। कमेटी की सिफारिशों पर अंतिम फैसला लेने से पहले आरबीआई की ओर से इन सुझावों को भी देखा जाएगा। इसी साल पांच फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति के साथ विकासात्‍मक एवं नियामक नीतियों को लेकर एक बयान जारी किया था। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने पूर्व डिप्‍टी गवर्नर एन एस विश्‍वनाथन की अगुवाई में प्राइमरी (शहरी) सहकारी बैंक को लेकर एक एक्‍सपर्ट कमेटी बनाने का ऐलान किया था। इस कमेटी की जिम्‍मेदारी इन बैंकों की समस्‍या को समझकर इस सेक्‍टर के लिए रोडमैप तैयार करना था। इसके लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्‍ट, 1949 में हालिया संशोधनों को भी ध्‍यान में रखना था। आरबीआई के पूर्व डिप्‍टी गवर्नर एन एस विश्‍वनाथन की अगुवाई वाली कमेटी ने न्‍यूनतम 300 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ एक अम्‍ब्रेला संस्‍थान बनाने का सुझाव दिया है। ये संस्‍थान शहरी सहकारी बैंकों के लिए स्‍व-नियमन ईकाई के तौर पर काम करेगा। बाद में इसे सदस्‍य बैंकों द्वारा यूनिवर्सल बैंक में तब्‍दील किया जा सकता है। इस संस्‍थान इन्‍फॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी सपोर्ट मुहैया कराने के लिए आरबीआई की ओर से एकबारगी अनुदान देने पर भी विचार किया जा सकता है।

आरबीआई की कमेटी ने सिफारिश की है कि शहरी सहकारी बैंकों में चार टियर के आधार पर रेगुलेट किया जा सकता है। ये टियर उनके डिपॉजिट बेस पर तय किया जाएगा। किसी एक जिले में ऑपरेट होने वाले बैंकों का न्‍यूनतम नेटवर्थ कम से कम दो करोड़ रुपए की होनी चाहिए। पहले टियर में शामिल बैंकों की नेटवर्थ कम से कम पांच करोड़ रुपए होनी चाहिए। इन बैंकों का न्‍यूतमन CRAR 9 से 14 फीसदी होना चाहिए। इसके अलावा कुछ शर्तें भी तय होंगी। अगर नियामकीय शर्तों को पूरा लिया जाता है तो ये बैंक एक जिले में 10 अतिरिक्‍त ब्रांचों को खोल सकते हैं।


Labels:

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget