राज्यपाल प्रस्ताव को ज्यादा लटका नहीं सकते

12 विप सदस्यों की नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी


मुंबई

महाराष्ट्र विधान परिषद में राज्यपाल की तरफ से नियुक्त 12 सदस्यों की नियुक्ति के मुद्दे पर हुई सुनवाई के दौरान बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि वह राज्यपाल को कोई सीधा आदेश नहीं दे सकते। हालांकि अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राज्यपाल कैबिनेट के प्रस्ताव को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रख सकते। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्यपाल का अगला कदम क्या होगा? इस पर सभी की निगाहें लगी होंगी।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति गिरीष कुलकर्णी की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई के दौरान संतुलित टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं, ऐसे में अदालत उन्हें आदेश नहीं दे सकती। इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार राज्यपाल का है, लेकिन मंत्रिमंडल की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को अनिश्चित काल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। बंबई हाईकोर्ट ने अपेक्षा व्यक्ति की कि राज्यपाल और सरकार के बीच समन्वय होना चाहिए। अदालत ने कहा कि संविधान ने राज्यपाल को जो अधिकार दिए हैं, उनमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते, लेकिन राज्यपाल और सरकार में समन्वय होना चाहिए, तभी राज्य का कामकाज ठीक तरीके से चल सकेगा। सरकार और राज्यपाल में किसी वजह से मतभेद हैं तो भी कैबिनेट की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव पर एक समय के भीतर निर्णय लेना राज्यपाल का संवैधानिक कर्तव्य है।

आठ माह की लंबी कालावधि

राज्य सरकार ने विधानपरिषद की सदस्यता के लिए 12 व्यक्ति की सूची राज्यपाल को 8 माह पूर्व भेजी थी। इस संदर्भ में अदालत ने अपनी राय रखी। अदालत ने कहा कि राज्यपाल को जल्द से जल्द कैबिनेट के प्रस्ताव पर निर्णय लेना चाहिए। 8 माह बीत जाने के बावजूद प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लिया गया, यह काफी लंबा वक्त है। खंडपीठ ने यह फैसला नाशिक निवासी रतन सोली की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। याचिका में मांग की गई थी कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से मंत्रिमंडल की सिफारिश के साथ नवंबर 2020 को विधानपरिषद की 12 सीटों पर मनोनयन करने के संबंध में भेजे गए प्रस्ताव पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।

राज्यपाल से तत्काल फैसला लेने की उम्मीद: मलिक  

इस मसले पर अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री और राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने उम्मीद जताई कि अब राज्यपाल इस संबंध में जल्द से जल्द फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र ने कहा कि राज्यपाल पर इस बात को लेकर कोई बंधन नहीं है कि उन्हें कितना समय लेना चाहिए, लेकिन कानूनी रूप से यह प्रावधान है कि ये अधिकार राज्य सरकार का है। कैबिनेट की तरफ से मंजूर किसी प्रस्ताव को मंजूरी देना राज्यपाल के लिए बंधनकारक है। उसे राज्यपाल ठुकरा नहीं सकते, लेकिन उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राज्य के हित के लिए राज्यपाल को यह फैसला जल्द से जल्द लेना चाहिए। मलिक ने कहा कि हमें उम्मीद है कि कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्यपाल इस बारे में तत्काल फैसला लेंगे।


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