नई इमारतों को नहीं मिलेगा कचरे का डिब्बा

मुंबई

कचरा की समस्या का उसी जगह पर निपटारा करने के लिए मनपा प्रशासन ने एक और कठोर निर्णय लिया है। डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का होने वाले भंडार को कम करने के लिए मनपा ने 2007 के बाद कि नई इमारतों  को कचरा डिब्बा नहीं देने का निर्णय लिया है, जिससे नई इमारतों का कचरा डंपिंग ग्राउंड पर न जा सके और कचरे का निपटारा उसी सोसायटी में होना चाहिए।

बता दें कि मनपा प्रशासन ने सोसायटियों में लोगों के घरों में कचरा इकठ्ठा करने के लिए नगरसेवक के फंड से 120 लीटर का कचरे का डिब्बा दिया जाता है। इसके अलावा सोसायटियों में रहने वाले लोगों को भी 10 लीटर का डिब्बा दिया जाता है। मनपा प्रशासन अब निर्णय लिया है कि 2007 के बाद कि बनी इमारतों को कचरे का डिब्बा नहीं दिया जाएगा। कचरे  के डिब्बे दो वर्ष में एक बार दिए जाते हैं। अक्टूबर 2020 से अब तक 49,119 कचरे के डिब्बे उपलब्ध कराए गए हैं। मनपा ने स्थायी समिति को लिखित जानकारी दी  है। पहले इन डिब्बों की आपूर्ति सभी सोसायटियों में की जाती थी, लेकिन अब 2007 की इमारतों में यह डिब्बे नहीं दिए जाएंगे।

घन कचरा व्यवस्थापन अधिनियम 2005 से सोसायटियों में जमा होने वाले सूखे व गीले कचर को अलग करना अनिवार्य है। विकास नियंत्रण नियमावली 2007 इसका प्रावधान किया गया था। इसके अलावा जिन सोसायटियों में प्रतिदिन 100 किलो कचरा निकलता है वहां भी अलग करना अनिवार्य किया गया है। इसे  पिछले तीन-चार साल से मनपा  सख्ती से अमल में ला रहा है। इसलिए डंपिंग में आने वाले कचरे की मात्रा 8 हजार से घटाकर 6,000 मीट्रिक टन हो गया है।


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