सभी को दो डोज के बाद बूस्टर पर विचार

कोरोनाः तीसरी लहर का खौफ!

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नई दिल्ली

देश में कोरोना महामारी की स्थिति फिर बिगड़ने लगी है। लगातार दूसरे दिन 40 हजार से ज्यादा (44,658) नए मामले सामने आए और 496 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, कुछ राहत की बात यह है कि केरल और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे देश में मामले नहीं बढ़ रहे हैं। केरल में शुक्रवार को 32,801 नए संक्रमित पाए गए और सबसे ज्यादा 179 लोगों की जान भी गई। केरल में अभी 1,95,254 सक्रिय मामले हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में हजार से डेढ़ हजार तक नए केस मिले हैं, जबकि महाराष्ट्र में चार हजार से ज्यादा केस आए।

24 घंटे में 93 लाख डोज लगे

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार सुबह अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक नए मामलों में वृद्धि और ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में कमी से सक्रिय मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान सक्रिय मामलों में 11,174 की बढ़ोतरी हुई है और इनकी संख्या 3,44,899 पर पहुंच गई है जो कुल संक्रमितों का 1.03 फीसद है। पिछले 24 घंटे में 93 लाख डोज लगाने का रिकॉर्ड बना है। अब टीकाकरण का आंकड़ा 62 करोड़ के पार हो गया है। सक्रिय मामलों का अनुपात जहां बढ़ रहा है, वहीं ठीक होने वाले मरीजों का अनुपात घट रहा है और मरीजों के उबरने की दर 97.63 फीसद पर आ गई है, जो 97.68 फीसद पर पहुंच गई थी।

देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका और टीकाकरण के बाद बनी एंटीबाॅडी के सीमित समय को देखते हुए पूरी दुनिया में वैक्सीन की तीसरी या बूस्टर डोज को लेकर मंथन शुरू हो गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार की पहली प्राथमिकता दिसंबर तक देश के सभी वयस्कों को वैक्सीन की दोनों डोज उपलब्ध कराने की है। उसके बाद तीसरी या बूस्‍टर डोज पर विचार होगा।

कोरोना के खिलाफ सरकार की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दुनिया में कई वैज्ञानिक बूस्टर डोज की जरूरत पर बल दे रहे हैं। कई देशों में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इसकी जरूरत भी महसूस की जा रही है। इसके लिए सबसे बड़ा तर्क यह दिया जा रहा है कि वैक्सीन के कारण शरीर में बनी एंडीबाॅडी लगभग तीन से छह महीने में समाप्त हो जाती है और वह व्यक्ति आसानी से कोरोना संक्रमित हो सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि वैक्सीन लेने वाले लोग संक्रमित होने के बाद भी गंभीर रूप से बीमार नहीं हो रहे हैं और उनमें बहुत कम लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। यानी वैक्सीन की दो डोज कोरोना के गंभीर संक्रमण और उससे होने वाली मौतों को रोकने में काफी हद तक कारगर साबित हो रही है। 


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