सही और सामयिक संदेश

प्ररधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हैदराबाद के नेशनल पुलिस एकेडमी के आईपीएस अधिकारियों से वर्चुअल बातचीत में जो संदेश दिया वह एकदम सही और सामयिक है. स्वतंत्रता के पूर्व पुलिस की भूमिका कुछ और थी और उसके बाद कुछ और हो गई. तब वे एक विदेशी हुक्मरान के मातहत थे और उन्‍हें उनके ही हितों के लिए समर्पित रहना था, स्वतंत्रता के बाद अतीत का पुलिसिया दृष्टिकोण  बदलने के लिए गत साढ़े सात दशकों में बहुत कुछ किया गया और देश के नीति नियंताओं ने, पुलिस नेतृत्‍व ने काफी कुछ किया भी, काफी बदलाव भी आये, लेकिन उसकी गति काफी धीमी रही है और चुनौतियां बढ़ती गईं. जनता के प्रति उनके रवैये और दृष्टिकोण में भी काफी बदलाव आया है, लेकिन अभी भी उनकी असंवेदनशीलता, ज्यादतियों, भ्रष्‍टाचार के दृष्टांत और कहानियां देश के किसी ना किसी कोने में सुर्खियां बनती रहती हैं। इसके लिए कई समितियां बनीं, सुधार के कदम उठाये गए लेकिन अभी भी वह आदर्श स्थिति नहीं बन पाई जिसकी अपेक्षा हमारे अतीत के नीति नियंताओं ने देखा था. आम आवाम अभी भी बहुत जरूरी ना हो तो पुलिस के पास जाने से कतराती है. प्रधानमंत्री द्वारा इस बात पर जोर दिया गया कि नए मैदान में उतरने वाले अधिकारी पुलिस की इस नकारात्मक छवि को बदलने के प्रति विशेष रूप से ध्यान दें. संकेत है कि अभी भी इस दिशा में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है. प्रधानमंत्री का यह कहना कि सिस्टम आपको बदल देता है या आप सिस्टम बदल देते हैं यह भी एक परीक्षा है. यह साफ इशारा है कि व्यवस्था में जो कमियां हैं, उसका हिस्सा ना बनकर या उसे नजरअंदाज ना कर उसे बदलने का प्रयास हो और यदि व्यक्ति के पास संकल्प शक्ति है, यथोचित प्रशिक्षित है और कुछ नया करने का मनोबल है तो सफलता अवश्य मिलती है. हमारे देश के पुलिस बलों में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जब अधिकारियों और जवानों ने अपने कार्य से विभाग का नाम रोशन किया और जनता के सच्चे हमदर्द के रूप में आज भी याद किए जाते हैं. पुलिस बल को उसी लीक पर चलने की जरूरत है. आजादी के 75 सालों में अपराध का तौर-तरीका काफी बदला है, इधर साइबर अपराध ने भी उनका काम काफी बढ़ाया है, अपराधी भी तकनीक निष्णात हो गए हैं, अत्‍याधुनिक साधनों का, हथियारों का उपयोग करते हुए पुलिस के समस्‍याओं और चुनौतियों में लगातार इजाफा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री का कहना कि आज की पुलिस बल की चुनौती इन नए तौर-तरीकों से होने वाले अपराधों को उनसे भी बेहतर तौर-तरीका अपनाकर रोकने की है. राहत की बात यह है कि तमाम आवश्‍यक सुविधाओं का अभाव होते हुए भी हमारे देश में पुलिस बल इन सारी चुनौतियों का बड़ी अच्‍छी तरह से सामना कर रही है और शातिर से शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा रहा है. आज आवश्‍यकता है सरकार और पुलिस विभाग दोनों ओर से ऐसी कोशिश हो जिससे विभाग का क्रिया-कलाप और प्रभावी हो और कानून व्यवस्था की ि‍स्थति चाक चौबंद हो. कारण किसी भी तरह के विकासात्‍मक क्रिया-कलाप के लिए शांति और सुव्यवस्था पहली जरूरत है. पुलिस को अपने आपको और जनोन्मुखी बनाना होगा, जिससे लोग अपनी समस्‍याएं लेकर बेहिचक उनके द्वार जा सके और सरकार को उन्हें वह हर स्तरीय साधन सुविधाएं उपलब्‍ध करनी होंगी, जिससे वे बदलते अपरा‌िधक परिदृश्य का विश्वास पूर्वक सामना कर सकें। उनकी आवास की, आधुनिक तकनीक  और अन्य साजो सामान की पूरी व्यवस्था समय-समय पर होनी जरूरी है. साथ ही जनसंख्या की बढ़त के अनुरूप पुलिस बल की नियुक्ति और थानों का निर्माण भी जरूरी है. यदि दोनों ओर से अपने कर्तव्यों का सही पालन होगा तो फिर हमारी पुलिस व्यवस्था को दुनिया में सर्वश्रेष्‍ठ बनने से कोई नहीं रोक सकता. तमाम नकारात्मकताओं के बावजूद भी आज भी हमारे पु‌िलस बल का काम, उसका नाम सराहनीय है और इसे और बेहतर किया जाय और यह हो सकता है यही प्रधानमंत्री की अधिकारियों से बातचीत का सारांश है।


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