पुनिया ने बताया- किस वजह से ओ​लिंपिक में उनकी तैयारियों पर पड़ा असर


नई दिल्ली

भारतीय पहलवान बजरंग पुनिया ने रविवार को कहा कि घुटने की चोट के कारण वह लगभग तीन सप्ताह तक मैट (अभ्यास) से दूर रहे थे, जिससे ओ​लिंपिक की उनकी तैयारियां प्रभावित हुईं और शनिवार को ब्रांज मेडल के मुकाबले के लिए सहयोगी सदस्यों की सलाह के उलट वह घुटने पर पट्टी लगाए बिना आए थे। बजरंग ने तोक्यो खेलों से पहले आखिरी रैंकिंग प्रतियोगिता पोलैंड ओपन में भाग नहीं लिया था। उनका तर्क था कि उन्हें प्वॉइंट से अधिक प्रैक्टिस की आवश्यकता थी। वह अभ्यास के लिए रूस गए, जहां एक स्थानीय टूर्नामेंट में उनका दाहिना घुटना चोटिल हो गया।    

अली अलीएव टूर्नामेंट में 25 जून को अंडर-23 यूरोपीय रजत पदक विजेता अबुलमाजिद कुदिएव के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान उनके घुटने में चोट लग गई थी। बजरंग अपने शुरुआती मुकाबलों में उस तरह की लय में नहीं दिखे जिसके लिए वह जाने जाते है। ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में कजाखस्तान के दौलत नियाजबेकोव के खिलाफ हालांकि उनकी वही रणनीति और आक्रामक खेल को देखने को मिला।  उन्होंने 8-0 से जीत दर्ज कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। बजरंग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं करीब 25 दिनों तक मैट ट्रेनिंग नहीं कर सका। मैं चोट के बाद भी ठीक से नहीं चल पा रहा था। ओ​लिंपिक जैसे टूर्नामेंट से पहले एक दिन की ट्रेनिंग से चूकना भी सही नहीं होता है।   

उन्होंने कहा कि मेरे कोच और फिजियो चाहते थे कि मैं ब्रांज मुकाबले में घुटने पर पट्टी बांधकर उतरूं, लेकिन मैं सहज महसूस नहीं कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरा पैर बांध दिया है, इसलिए मैंने उनसे कहा कि अगर चोट गंभीर हो जाए तो भी मैं बाद में आराम कर सकता हूं लेकिन अगर मैं अब पदक नहीं जीत पाया तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। इसलिए मैं बिना पट्टी के ही मैट पर उतरा था।  

उन्होंने कहा कि चिकित्सक चाहते थे कि मैं इलाज के लिए भारत वापस आऊं (रूस से) लेकिन मैंने उनसे कहा कि यात्रा के दौरान वायरस (कोविड-19) के संपर्क में आने के खतरे के कारण यह संभव नहीं है।


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